पैरालिंपिक_: भारत ने बार-बार रचा इतिहास

 31 Aug 2021 02:31 AM

टोक्यो टोक्यो पैरालिंपिक में भारतीय एथलीट्स ने कमाल ही कर दिया। सोमवार को भारत ने एक दिन में 2 गोल्ड सहित कुल 5 मेडल जीते। अवनि लेखरा ने शूटिंग में और सुमित अंतिल ने जेवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके अलावा देवेंद्र झाझरिया ने जेवलिन में और योगेश कथुनिया ने डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल जीता। वहीं सुंदर सिंह गुर्जर को जेवलिन थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल हासिल हुआ। भारत ने सोमवार को इतने मेडल जीते, जितने उन्होंने किसी एक पैरालिंपिक में कभी नहीं जीते। अब तक टोक्यो पैरालिंपिक गेम्स में भारत कुल 7 मेडल जीत चुका है। इससे पहले रविवार को भाविनाबेन पटेल ने विमेंस टेबल टेनिस की क्लास-4 कैटेगरी में सिल्वर जीता था। वहीं मेंस एफ 47 हाई जंप में निषाद कुमार ने 2.06 मीटर की जंप के साथ एक और सिल्वर भारत के नाम कर दिया। यह भारत का अब तक का सबसे सफल पैरालिंपिक बन गया है। इससे पहले 2016 रियो ओलिंपिक और 1984 ओलिंपिक में भारत ने 4-4 मेडल जीते थे। भारतीय पैरा एथलीटों के इस पर्दशन के बाद पदक विजेताओं को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और खेल मंत्री ने दी बधाई दी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने टोक्यो पैरालिम्पिक में विभिन्न स्पर्धाओं में पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। वहीं पदक विजेता खिलाड़ियों अवनि लखेरा, सुमित अंतिल, देवेंद्र झाझरिया, योगेश कथुनिया और सुंदर सिंह गुर्जर से प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी फोन पर बात भी की। टोक्यो पैरालिंपिक्स में एक बार फिर राष्ट्रगान सुनने को मिला। पैरा शूटर अवनि लेखरा को पोडियम पर जब गोल्ड मेडल दिया गया, तब राष्ट्रगान से भारत का हर एक नागरिक गर्व से भर गया। यह खुशी तब डबल हो गई जब सुमित अंतिल ने भी गोल्ड मेडल जीता और एक दिन में दूसरी बार जन-गण-मन की धुन सुनाई दी।

सुमित ने 5 प्रयास में 3 बार तोड़ा विश्व रिकॉर्ड और देश को दिलाया स्वर्ण पदक

सुमित ने पैरालिंपिक में अपने ही वर्ल्ड रिकॉर्ड को तोड़ा है। उन्होंने पहले प्रयास में 66.95 मीटर का थ्रो किया, जो वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। इसके बाद दूसरे थ्रो में उन्होंने 68.08 मीटर दूर भाला फेंका। सुमित ने अपने प्रदर्शन में और सुधार किया और 5वें प्रयास में 68.55 मीटर का थ्रो किया, जो नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया। उनका तीसरा और चौथा थ्रो 65.27 मीटर और 66.71 मीटर का रहा था। जबकि छठा थ्रो फाउल रहा। सोनीपत के सुमित का सफर कठिनाइयों भरा रहा है। 6 साल पहले हुए सड़क हादसे में एक पैर गंवाने के बाद भी सुमित ने जिंदगी से कभी हार नहीं मानी और बुलंद हौसले से हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला किया।

अवनिने गोल्ड के साथ रचा इतिहास, पिता ने कहा- बेटी ने सिर ऊंचा कर दिया

राजस्थान के जयपुर की रहने वाली 19 साल की अवनि पैरालिंपिक गेम्स में गोल्ड जीतने वाली भारत की पहली महिला एथलीट बन गर्इं हैं। पैरालिंपिक के इतिहास में भारत को शूटिंग में यह पहला गोल्ड मेडल दिलाया। उन्होंने महिलाओं के 10 मीटर एयर राइफल के क्लास एसएच1 के फाइनल में 249.6 पॉइंट स्कोर कर गोल्ड मेडल जीता। अवनि के पिता प्रवीण लेखरा रेवेन्यू अपील अधिकारी हैं और फिलहाल गंगानगर में पोस्टेड हैं। उन्होंने बताया कि बेटी सिर ऊंचा कर दिया। उसने मेडल तो जीत लिया, मगर इसे स्वीकारा नहीं जाता है। पैरालिंपिक के लिए कहते हैं कि वहां कॉम्पिटिशन नहीं होता है।

योगेश ने डिस्कस थ्रो में सिल्वर जीता, कहा- लक्ष्य वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना था

योगेश कथुनिया ने एफ-56 कैटेगरी में डिस्कस थ्रो में भारत के लिए सिल्वर जीता। दिल्ली के 24 साल के योगेश ने अपने छठे और आखिरी प्रयास में 44.38 मीटर का अपना बेस्ट थ्रो किया। यह उनका सीजन बेस्ट भी है। ब्राजील के बतिस्ता डॉस सैंटोस क्लॉडनी ने 45.25 मीटर के थ्रो के साथ इस इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। योगेश ने कहा कि अगर तीसरा थ्रो फाउल नहीं होता, तो वे वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने में सफल हो जाते। योगेश ने सिल्वर मेडल अपनी मां को समर्पित किया। बोले कि मां ने हमेशा प्रेरित किया। खेल को करियर बनाने में पूरा साथ दिया।

देवेंद्र ने सिल्वर मेडल जीता, कहा- गोल्ड की हैट्रिक नहीं लगा पाने का मलाल रहेगा

दो बार के पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट देवेंद्र झाझरिया ने टोक्यो में एक और मेडल अपने नाम किया। उन्होंने एफ-46 कैटेगरी में 64.35 मीटर दूर भाला फेंका। जबकि सुंदर गुर्जर ने 64.01 मीटर का थ्रो किया। राजस्थान के चुरु जिले के देवेंद्र झाझरिया ने इससे पहले रियो पैरालिंपिक 2016 और एथेंस पैरालिंपिक 2004 में गोल्ड मेडल जीता था। उनके नाम भारत की ओर से पैरालिंपिक में 2 बार गोल्ड जीतने का रिकॉर्ड है। देवेंद्र के पास अब कुल 3 पैरालिंपिक मेडल हो गए हैं। मेडल जीतने के बाद वह काफी खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्हैं लगातार तीसरा गोल्ड मेडल नहीं जीत पाने का रहेगा।

विनोद से छीना गया ब्रॉन्ज मेडल

रविवार को डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज जीतने वाले विनोद कुमार से आज मेडल छीन लिया गया। कुछ देशों ने उनकी क्लासिफिकेशन कैटेगरी को लेकर आपत्ति जताई थी। भारत के मिशन प्रमुख गुरशरन सिंह ने बताया कि आॅर्गेनाइजर्स ने विनोद को उनकी क्लासिफिकेशन कैटेगरी में योग्य नहीं पाया। 41 साल के विनोद ने एफ-52 कैटेगरी में पैरालिंपिक में हिस्सा लिया था। इस कैटेगरी में उन एथलीट्स को शामिल किया जाता है, जिनकी मांसपेशियों में कमजोरी होती है। अंग की कमी और पैर की लंबाई असमान होती है। ऐसे खिलाड़ी व्हीलचेयर पर बैठकर कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेते हैं।

विनोद का शरीर इस कैटेगरी से ज्यादा मजबूत

गुरशरन ने कहा कि आॅर्गेनाइजर्स ने मेडल वापस लेते हुए कहा कि विनोद का शरीर इस कैटेगरी से ज्यादा मजबूत है। टेक्नीकल कमेटी ने उन्हें ''क्लासिफिकेशन नॉट कम्प्लीटेड'' कैटेगरी में रखा है। इस वजह से विनोद का परफॉर्मेंस फाइनल से हटा दिया गया। इससे पहले 22 अगस्त को भी उनकी जांच हुई थी। तब आॅर्गेनाइजर्स ने कहा था कि इवेंट के दौरान उनकी जांच की जाएगी। तब विनोद को खेलने की इजाजत दी गई थी। विनोद ने फाइनल में 19.91 मीटर के बेस्ट थ्रो के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता था।

सुंदर का टीन शेड से हाथ कटा, फिर भी हौसले को कम नहीं होने दिया

राजस्थान के करौली जिले के रहने वाले पैरालिंपिक खिलाड़ी सुंदर सिंह गुर्जर ने जापान के टोक्यो में 64.01 मीटर जेवलिन थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल जीता। सुंदर की इस सफलता से परिजन और गांव में खुशी का माहौल है। सुंदर गुर्जर का यह सफर आसान नहीं रहा है। एक समय ऐसा आया था जब सुंदर का भविष्य अधर में लटक गया था। सुंदर पूरी तरफ फिट थे और 2015 तक सामान्य वर्ग में भाला फेंक प्रतियोगिता में हिस्सा लेते थे। 2016 में एक दुर्घटना सुंदर के करियर का टर्निंग पॉइंट रहा। इसी साल उन्होंने ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई किया। एक दिन वे अपने दोस्त के घर गए, जहां आंधी में घर के आगे लगी टीन शेड उड़कर सुंदर के ऊपर आ गिरी। इस हादसे में उनका बायां हाथ कट गया। वे ओलिंपिक में भाग नहीं ले पाए। हालांकि, सुंदर ने हार नहीं मानी और एक हाथ को ही अपनी मजबूती बनाई। अपनी मेहनत से वे पैरालिंपिक गेम्स के लिए क्वालिफाई कर गए। अब मेडल जीतकर उन्होंने अपने सपनों को पूरा किया। सुंदर को सिर्फ जेवलिन नहीं बल्कि डिस्कस थ्रो और शॉटपुट में भी महारत हासिल है।

देश का मान बढ़ाया, अब खिलाड़ियों पर धनवर्षा

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सोमवार को टोक्यो पैरालिंपिक में विश्व रिकॉर्ड के साथ भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतने वाले सुमित अंतिल को 6 करोड़ रुपए और रजत पदक जीतने वाले चक्काफेंक खिलाड़ी योगेश कथूनिया को 4 करोड़ रुपए पुरस्कार देने की घोषणा की। हरियाणा सरकार दोनों को सरकारी नौकरी भी देगी। वहीं राजस्थान सरकार ने शूटर अवनि लखेरा को तीन करोड़ रुपए, देवेंद्र झाझड़िया को रजत जीतने पर 2 करोड़ तथा सुन्दर सिंह गुर्जर को कांस्य पदक जीतने पर 1 करोड़ रुपए की राशि इनाम स्वरुप प्रदान की जाएगी। वहीं सरकार इन्हें सरकारी नौकरी भी देगी।

  पैरालिंपिक मेडल टेबल

  क्रम    देश    स्वर्ण    रजत    कांस्य    कुल पदक
 
1     चीन      54      35       30            119
  2     ब्रिटेन    26      20       22             68
  3   आरओसी 19      11        31             61
  4   अमेरिका 18      19        12             49
  5    यूक्रेन     12      27        15             54
26    भारत    02      04        01              7