जगन्नाथ रथ यात्रा आज : पुरी में लगातार दूसरे साल श्रद्धालुओं के बगैर कड़ी सुरक्षा के साथ निकाली जा रही रथ यात्रा

 12 Jul 2021 10:01 AM

भुवनेश्वर। जगन्नाथ धाम पुरी में आज बिन भक्तों के ही महाप्रभु की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा कड़ी सुरक्षा के बीच निकाली जा रही है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि में आज महाप्रभु रत्न सिंहासन से बाहर निकल कर नौ दिन की यात्रा में भाई बहन के साथ गुंडिचा यात्रा पर जाएंगे। जानकारी के मुताबिक निर्धारित समय से पहले ही सकाल धूप, खिचड़ी भोग नीति सम्पन्न होने के बाद रथ प्रतिष्ठा किया गया गया। इसके बाद श्रीविग्रहों की पहंडी बिजे शुरू हुई है। सबसे पहले सुदर्शन की पहंडी बिजे की गई। इसके बाद भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा को पहंडी बिजे में लाकर रथ पर विराजमान किया गया। सबसे अंत में महाप्रभु जगन्नाथ जी की पहंडी बिजे शुरू हुई है।

भोर से ही शुरू हो चुकी हैं नीतियां
ओडिशा के पुरी में महाप्रभु जगन्नाथ जी की रथयात्रा दोपहर 3 बजे से निकाली जाएगी लेकिन रथयात्रा के लिए नीतियां भोर से ही शुरू हो चुकी हैं। भोर 4:30 मंदिर का दरवाजा खोला गया और फिर मंगल आरती की गई। मंगल आरती सम्पन्न होने के बाद अवकाश नीति, इसके बाद द्वारपाल पूजा, सूर्य पूजा तत्पश्चात सकाल धुप में प्रभु को खिचड़ी भोग लगाया गया। मंत्रोच्चारण कर रथ प्रतिष्ठा नीति सम्पन्न होने के बाद 24 पुरोहित वहीं जगन्नाथ मंदिर में स्थित चाहाणी मंडप पर तीनों रथों के 24 पुरोहित रथ प्रतिष्ठा के लिए हवन करेंगे।

हवन के बाद रथों के आचार्य संपाति जल को लेकर तीनों रथों के ऊपर जाकर रथ प्रतिष्ठा नीति सम्पन्न करेंगे। इन रथों पर श्री विग्रहों को स्थापित किया जाएगा। उनके आयुध बड़े भाई बलभद्र के रथ पर नृसिंह और उनके आयुध हल और मूसल स्थापित करेंगे। भगवान के बैठने वाले स्थान पर ताजा पुष्पों को रखा जाएगा। इसके पश्?चात भगवान जगन्नाथ जी के नंदीघोष रथ पर हनुमान जी एवं भगवान के आयुध शंख व चक्र स्थापित हांगे। भगवती मां सुभद्रा के रथ पर भुवनेश्वरी के आयुध को स्थापित किया जाएगा। 24 ब्राह्मणों द्वारा अभिमंत्रित जल को वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ तीनों रथों पर छिड़काव किया जाएगा। यह कार्य संपन्न होने के बाद रथ के महारणा सेवकों को फूल और ध्वजा दी जाएगी, जिसे महारणा सेवक नीलचक्र में लगाएंगे।

समयानुसार निभायी जा रही हैं जगन्नाथ रथयात्रा की नीतियां 
सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर मंगला आरती की गई। रथ प्रतिष्ठा का समय 8 बजे और इसके पश्चात 8 बजकर 30 मिनट पर पहंडी बिजे। 11 बजकर 30 मिनट पर पहंडी बिजे समाप्त होगी। इसके पश्चात शंकराचार्य रथ पर विराजमान चतुर्धा विग्रहों के पावन दर्शन करेंगे। 12 बजकर 45 मिनट से 2 बजे के बीच गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव रथ पर छेरापहंरा की रीति नीति करेंगे। अपराह्न 3 बजे से पुरी में रथ खींचने की प्रक्रिया की शुरूआत होगी। बता दें कि प्रत्येक रथ को खींचने के लिए 500 सेवक मौजूद रहेंगे, तीनों रथों को कुल 1500 सेवकों के द्वारा खींचा जाएगा।