कृष्ण जन्माष्टमी आज: इस ग्रह-नक्षत्र में हुआ था श्रीकृष्ण का जन्म, कृष्णमय हो जाती है ब्रज की नगरी मथुरा

 30 Aug 2021 10:08 AM

भोपाल। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को पूरे देश में बड़े ही धूम-धाम के साथ कृष्ण जन्माष्टमी पर्व के रूप में मनाया जाता है। न सिर्फ भारत में बल्कि विदेश में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम रहती है। हिंदू धर्म के सबसे खास त्योहारों में से एक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन लोग उपवास रखकर घर-परिवार की सुख और शांति के लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान की विशेष पूजा अर्चना करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मथुरा भगवान कृष्ण का जन्मस्थान है, यहां यह त्योहार और भी विशेष उत्सव के साथ मनाया जाता है। संतान प्राप्ति,आयु और समृद्धि के लिए जन्माष्टमी पर्व का विशेष महत्व है। इस साल 30 अगस्त के दिन जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्य रात्रि के समय कारागार में हुआ था।

कृष्ण जन्माष्टमी का इतिहास

सदियों से भारत में कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बड़े ही श्रृद्धा भाव के साथ मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार भगवान ने पृथ्वी को कंस के आतंक से मुक्त कारने के लिए अवतार लिया था। भाई कंस के अत्याचार सहते हुए कारागार में बंद माता देवकी की आठवीं संतान के रूप में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसी मान्यता के अनुसार हर साल भाद्रपद यानी भादों मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।

कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण को विष्णु का अवतार माना जाता है। यही कारण है कि यह पर्व विशेष महत्व रखता है। इस दिन मंदिरों में विशेष सजावट करके भगवान की प्रक्टोत्सव को विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद और कृपा पाने के लिए इस दिन लोग उपवास रखने के साथ विधि-विधान से पूजा और भजन करते हैं। मध्यरात्रि के समय भगवान के जन्मोत्सव के समय सभी लोग मंदिरों में एकत्रित होकर विशेष पूजा करते हैं। कुछ स्थानों में दही-हांडी का भी उत्सव रखा जाता है।

 

मथुरा में मचती है धूम

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन मौके पर कान्हा की मोहक छवि देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु मथुरा पहुंचते हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर ब्रज की पूरी नगरी मथुरा ही कृष्णमय हो जाती है। इसलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है।

12 बजे होता है जन्म उत्सव

तिथि के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद की कृष्णपक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में हुआ था इसलिए घरों और मंदिरों में मध्यरात्रि 12 बजे कृष्ण भगवान का जन्म उत्सव मनाते हैं। रात में जन्म के बाद दूध से लड्डू गोपाल की मूर्ति को स्नानादि कराने के बाद नए और नए कपड़े व गहने पहनाकर श्रीकृष्ण का श्रृंगार किया जाता है, फिर पालने में रखकर पूजा के बाद चरणामृत,पंजीरी, ताजे फल और पंचमेवा आदि का भोग लगाकर प्रसाद के तौर पर बांटते हैं।

 

सजाई जाती है झांकी

जन्माष्टमी के पावन पर्व को लोग उत्साह और जोश के साथ मनाते हैं। इस दिन घरों और मंदिरों में झांकी भी सजाते हैं। इन झांकियों की श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर पूरे जीवनकाल के दृष्टांत दिखाए जाते हैं। चूंकि भगवान जन्म कारागार में हुआ था, इसलिए इस दिन पर कई पुलिस लाइन्स में भगवान की सुंदर झांकियां सजाई जाती हैं।

दही हांडी की परंपरा

जन्माष्टमी की सबसे लोकप्रिय परंपरा में से एक दही हांडी फोड़ने का रिवाज भी है। इस परंपरा को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। लोग अपने गली मुहल्ले में दहीं हांडी की प्रतियोगिता रखते हैं, फिर समूह के लोग चढ़कर मटकी फोड़ कार्यक्रम करते हैं। खासतौर पर यह परंपरा भारत में गुजरात और महाराष्ट्र में देखी जाती है।