कोरोना का नया वैरिएंट टीके को भी कर सकता है बेअसर

 31 Aug 2021 01:38 AM

नई दिल्ली कोरोना के डेल्टा वैरिएंट और डेल्टा प्लस वैरिएंट का कहर फिलहाल दुनियाभर के कई देशों में जारी है। इस बीच दक्षिण अफ्रीका और कई अन्य देशों में सामने आए कोराना के नए वैरिएंट सी.1.2 ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। आशंका है कि सी.1.2 वैरियंट पहले के सभी स्वरूपों से अधिक संक्रामक हो सकता है और कोरोना वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा को भी बेअसर कर सकता है। दक्षिण अफ्रीका स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज एवं क्वाजुलु नैटल रिसर्च इनोवेशन एंड सीक्वेंसिंग प्लैटफॉर्म के वैज्ञानिकों ने कहा, कोरोना के नए स्वरूप सी.1.2 का इस साल मई में पता चला था। उन्होंने कहा, तब से लेकर गत 13 अगस्त तक यह स्वरूप चीन, कांगो, मॉरीशस, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल और स्विट्जरलैंड में मिल चुका है।

म्यूटेशन की रμतार अन्य वैरिएंट्स से दोगुनी

रिसर्चर्स ने बताया, नए वैरिएंट में दुनिया भर में मिले वैरिएंट आॅफ कंसर्न व वैरिएंट आॅफ इंटरेस्ट से ज्यादा म्यूटेशन हुआ है। स्टडी में साउथ अफ्रीका में हर महीने सी.1.2 जीनोम की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। ये मई में 0.2% से बढ़कर जून में 1.6% और फिर जुलाई में 2% हो गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बढ़ोतरी वैसी ही है, जिस तरह शुरुआती पहचान के दौरान देश में बीटा व डेल्टा वैरिएंट के साथ देखी गई थी। स्टडी के मुताबिक सी.1.2 वायरस में हर साल लगभग 41.8 म्यूटेशन हो रहे हैं। इसकी यह रμतार वायरस के दूसरे वैरिएंट से लगभग दोगुनी है।

वैक्सीन के लिए चुनौती

कोलकाता के सीएसआईआरइंडि यन इंस्टीट्यूट आॅफ केमिकल बायोलॉजी से जुड़ी वायरोलॉजिस्ट उपासना ने कहा कि यह वैरिएंट ज्यादा संक्रामक और तेजी से फैलने की क्षमता रखता है। स्पाइक प्रोटीन में बहुत सारे म्यूटेशन होते हैं, इसलिए यह इम्यून सिस्टम से बच सकता है और यह दुनिया भर में चल रहे वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए एक चुनौती बन सकता है।

एक नजर में...

इस साल मई में पहली बार दक्षिण अफ्रीका में इसका पता लगाया गया था। 􀂄

चीन, मॉरीशस, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल और स्विटजरलैंड में भी मिला। 􀂄

रोग प्रतिरोधी क्षमता को चकमा दे सकता है।