डील की समीक्षा: चीन को 44 हजार करोड़ का झटका दे सकता है कांगो

 30 Aug 2021 03:11 AM

नैरोबी एशिया के बाद अफ्रीकी देशों को अपने आर्थिक कूटनीति के जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे चीन को तगड़ा झटका लग सकता है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आॅफ कांगो की सरकार ने चीन के साथ लगभग 44 हाजर करोड़ की माइनिंग डील की समीक्षा शुरू कर दी है। कांगो के वित्त मंत्री निकोलस काजादी ने बताया, सरकार चीनी निवेशकों के साथ किए गए माइनिंग अनुबंधों की समीक्षा कर रही है। यह सौदा 6 बिलियन डॉलर का है जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर-फॉर-मिनिरल्स डील नाम दिया है। राष्ट्रपति फेलिक्स त्सेसीकेदी ने मई में कहा था, कुछ खनन अनुबंधों की समीक्षा की जा सकती है, क्योंकि वे कांगो को पर्याप्त रूप से लाभान्वित नहीं कर रहे हैं। कांगो कोबाल्ट का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक व तांबे का प्रमुख खननकर्ता है। इसलिए चीन इस देश पर नजर गड़ाए हुए है। कांगो सरकार ने इस महीने घोषणा की थी कि उसने चीन मोलिब्डेनम के बड़े पैमाने पर टेनके फंगुरुमे कॉपर एंड कोबाल्ड माइन में भंडार व संसाधनों का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए एक आयोग का गठन किया था। इसके जरिए सरकार अपने अधिकारों के दावे को मजबूत करना चाहती है।

कंपनियों ने साधी चुप्पी

कांगो सरकार के इस ऐलान पर सिनोहाइड्रो व चाइना रेलवे ने रॉयटर्स के सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की है। सिकोमाइन कॉपर व कोबाल्ट जॉइंट वेंचर के उप महानिदेशक एली त्सिंगुली ने भी कोई जबाव नहीं दिया है। इस जॉइंट वेंचर का अधिकतर स्वामित्व चीन की सरकारी कंपनी सिनोहाइड्रो व चाइना रेलवे के पास ही है।

शर्तों का किया उल्लंघन

कांगो की पूर्ववर्ती सरकार ने चीन की सिनोहाइड्रो व चाइना रेलवे को सिकोमाइन वेंचर में 68% की हिस्सेदारी दी थी। लेकिन अब आलोचकों का कहना है कि चीन ने वादा किए गए कुछ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है।