नटवरी कथक में कृष्ण चरित्र के चार प्रसंगों की प्रस्तुति

 31 Aug 2021 01:46 AM

मैं कथक शैली में नृत्य करती हूं। कृष्ण को कथक के माध्यम से देखने का प्रयास किया है। ऐसा इसलिए भी, क्योंकि कृष्ण का चरित्र कथक में बहुत प्रभावी तरीके से आता है। साथ ही जितने भी छंद और कवित्त लिखे गए हैं सभी कृष्ण पर ही ज्यादातर लिखे गए हैं। यह कहना है, कथक नृत्यांगना सुचित्रा हरमलकर का । वे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर ललित पर्व में कृष्णायन के अंतर्गत प्रस्तुति देने अपनी शिष्यों के साथ इंदौर से आईं थीं। उन्होंने बताया कि प्रस्तुति में गीत के प्रकार ठुमरी या भजन करते हैं, वह सब भी कृष्ण पर बेस्ड हैं। मैंने अपनी इस प्रस्तुति में नटवरी कथक का प्रयोग किया गया है,जिसमें कथक के गीतिक प्रकार हैं, जैसे अष्टपदी और भजन यही मूल रूप है कृष्णायन का। साथ ही इसमें दिखाने की कोशिश भी यही की है,कृष्ण चरित्र बहुरंगी है और कई रूपों में वे हमारे सामने आते हैं ।

पल्लवी, मोहना पल्लवी व मोक्ष नृत्य ओडिसी शैली में

गमक के अंतर्गत अनुषा जैन द्वारा ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। उन्होंने शुरुआत पल्लवी नृत्य से की। प्रस्तुति का संगीत संयोजन पंडित भुवनेश्वर मिश्रा ने किया है। पल्लवी नृत्य का भाव यह है कि कोमल भाव से विकास होना। दूसरी प्रस्तुति मोहना पल्लवी नृत्य की दी। इसके बाद अंतिम प्रस्तुति मोक्ष नृत्य की हुई। इसमें ताल एक ताली और जाति चतुश्रा रही।

लॉकडाउन में तैयार किए थे चार प्रसंग

लॉकडाउन के चलते काफी समय से प्रस्तुति नहीं हुईं थीं। जब-जब लॉकडाउन खुला उसके बाद मंच पर प्रस्तुति देने का दबाव जरूर रहा। एक बात अच्छी थी कि जब भी मौका मिलता था सभी शिष्याएं मिलकर प्रैक्टिस जरूर करती थीं। हमने जन्माष्टमी के लिए चार प्रसंग तैयार किेए थे, जिसमें रूप सौंदर्य को दिखाते हुए अष्टपदि निरतत अंग ढंग सुढंग..., पर रही। इसके बाद मीरा के पद, द्रोपदी चीर हरण और गोवर्द्धन धारण के प्रसंग को दिखाया। वहीं सावन के चलते झूला गीत झूला धीरे से झुलाओ रे बनवारी रे सांवरिया..., पर कथक किया। प्रस्तुति का समापन दशावतार प्रसंग से किया। जिसमें कृष्ण के दस अलग-अलग रूपों का वर्णन किया। -सुचित्रा हरमलकर, कथक नृत्यांगना