पट्टचित्र यानी कपड़े पर चित्रकारी में दिखाया कालिया दमन और दशावतार

 31 Aug 2021 01:53 AM

ओडिशा की मंत्रमुग्ध कर देने वाली पट्ट चित्रकला का सदियों पुराना इतिहास है। चित्र कला के इस पारंपरिक स्वरूप के तत्व पौराणिक संस्कृति में निहित हैं। जिनमें हिंदू कथाओं के तत्वों को विविध रंगों और अद्भुत शिल्प कौशल के साथ प्रस्तुत किया जाता है। इंदिरा गांधी मानव संग्रहालय के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि कृष्णा लीला-पट्ट चित्र, पुरी(ओडिशा) के चित्रकार समुदाय से संकलित किया गया है। इस चित्रकारी को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है, जिसमें पट्टचित्र या कपड़े पर चित्रकारी, भित्ति चित्र या दीवारों पर चित्रकारी, और तालपत्र चित्र या पोथी चित्र अर्थात ताड़ के पत्ते पर नक्काशी। हालांकि, इन सभी किस्मों की शैली लगभग एक जैसी ही है। कपड़े पर निर्मित यह चित्र कृष्ण लीला को दर्शाता है, जो भगवान की मोहक और रोचक कहानियां हैं और काले रंग की पृष्ठभूमि पर सफेद रंग से तैयार की गई हैं। चित्र को तीन दृश्य भागों में वर्णित किया गया है। चित्र के मध्य भाग में कमल के प्रतिमान में रास मंडल को दिखाया गया है जहां भगवान कृष्ण और राधा को अन्य गोपियों के साथ चित्रित किया गया है। आयतकार स्थान के अंदर चित्रित ऊपरी और निचला हिस्सा भगवान विष्णु के दशावतार को दिखाता है। अंत में, पेंटिंग के किनारों पर भगवान कृष्ण की पूरी जीवन कथा को उनके जन्म से लेकर, राक्षसों के वध, कालिया-दमन, गोवर्धन पर्वत को उठाना, वस्त्रहरण, और उनके जीवन की अन्य लोकप्रिय घटनाओं को दर्शाया गया है।