बी-स्कूल्स में भी गेट थिंग्स डन के रूप में स्टूडेंट्स को पढ़ाई जाती है कृष्णनीति

 30 Aug 2021 01:42 AM

हजारों साल गुजर चुके हैं, लेकिन श्रीकृष्ण में जनमानस व लेखकों की रुचि लगातार बनी है। वे आज भी लेखकों की प्रेरणा हैं। उनका जीवन विविधताओं से भरा है, यही वजह है कि मैनेजमेंट एक्सपर्ट्स के वे चहेते रहे हैं। तमाम बीस्कू ल्स में श्रीकृष्ण को बतौर केस स्टडी पढ़ाया जाता है और मैनेजमेंट में उनके ऊपर पेपर्स लिखे जाते हैं। कॉर्पोरेट ट्रेनर से लेकर बी-स्कूल्स फैकल्टी क्लासरूम में उन्हें कोट करते हैं। चाहे प्रबंधन के क्षेत्र से जुड़े हों या किसी और से, भगवान कृष्ण के जीवन पर एक सरसरी निगाह डालने की जरूरत तो है ही। उनके जीवन के कुछ हिस्सों से जब हम गुजरते हैं तो हमें अहसास होता है कि उनमें प्रबंधन की अद्भुत क्षमता रही होगी। उनके लाइफ मैनेजमेंट सूत्र आज के समय में भी प्रासंगिक हैं। जन्माष्टमी के मौके पर पढ़ें कि उन पर लिखी गई मैनेजमेंट बुक्स क्या कहती हैं। जानें एक्सपर्ट्स क्यों कहते हैं कि प्लानिंग, एक्शन और एग्जीक्यूशन को कृष्ण सबसे बेहतर समझाते हैं।

कृष्ण के मैनेजमेंट पर लिखी गई किताबें

द टीचिंग्स आफ कृष्णा: पायरी कोरबिल

कृष्णा द मैनेजमेंट गुरु: सुनीता पंत बंसल

मैं कृष्ण हूं: दीप त्रिवेदी

लॉर्ड कृष्णा इन द बोर्डरूम: बीएस तीर्थ महाराज

मैनेजमेंट विज्डम आफ लॉर्ड कृष्णा- वीर सिंह उदय

कृष्णा की: अश्विन सांघी

कृष्णा: ग्रेटेस्ट स्प्रिचुअल विज्डम फॉर टफ टाइम्स: प्रणय

कृष्णनीति: गिरीश जाखोटिया

प्लानिंग, एक्शन, अचीव और एग्जीक्यूशन सीखें

क्लासरूम में भारतीय माइथोलॉजी जरूर कोट की जाती है, क्योंकि जो ज्ञान विज्ञान के रूप में अब हमें पश्चिम से मिल रहा है वह भारतीय वेद- पुराणों और महाकाव्यों में हजारों साल पहले दिया जा चुका है। श्रीकृष्ण इसके सबसे सटीक उदाहरण हैं। वे प्लानिंग, एक्शन, अचीव व एग्जीक्यूशन समझाते हैं। कॉर्पोरेट सेक्टर में भी इसी तरह से काम का होता है कि पहले से विजन तय किया जाता है , जो कि श्रीकृष्ण ने तय किया। उन्होंने शांतचित्त रहकर हर पक्ष से बात की फिर तय किया कि करना क्या है। जिन लोगों से उन्हें लक्ष्य की पूर्ति करानी थी उनके सारे संशय दूर किए और आत्मविश्वास पैदा किया कि वे जो कर रहे हैं वो ठीक है। जहां कोई कड़ी कमजोर पड़ी वे फिर सामने आए, एक लीडर को ऐसा ही होना चाहिए अपने लोगों से काम करना चाहिए और उन पर भरोसा करना चाहिए, जहां जरूरत पड़े वहां सामने आना चाहिए। इसे मैनेजमेंट हम ‘गेट थिंग्स डन ’ के रूप में पढ़ाते हैं। -अमरजीत सिंह खालसा, मैनेजमेंट एक्सपटर् व डायरेक्टर, आईपर

1 सही-गलत का ज्ञान: जब गोकुलवासी बारिश के लिए इंद्रदेव की पूजा करते थे श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि बारिश करना तो इंद्र का कर्तव्य है। इसके लिए उनकी पूजा करना न करें। उसके स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करना चाहिए, जो हमारे गौधन को समृद्ध करता है।

2 एंगर मैनेजमेंट: जीवन में सफलता के लिए अपने गुस्से पर काबू रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि, इससे बात बनती नहीं बल्कि बिगड़ती ही है। कृष्ण ने अर्जुन को यही समझाया कि, हे अर्जुन क्रोध से केवल बुद्धि का नाश होता है। इसलिए क्रोध पर नियंत्रण रख विवेक से काम लो।

3 खुद का मूल्यांकन, पहचानें अपनी शक्ति: कहा जाता है कि हम कितने पानी में हैं, यानी हमारी क्या योग्यता है हम खुद जानते हैं। कृष्ण ने महाभारत युद्ध के समय कई बार अर्जुन को उनकी ताकत, योग्यता व क्षमता याद दिलाई।

4 मास्टर स्ट्रेटजी : किसी भी काम, प्रोजक्ट को पूरा करने, लाइफ में सफलता के लिए एक स्ट्रेटजी का होना बहुत जरूरी है। बिना किसी प्लानिंग के कोई भी काम सफल नहीं हो सकता। बड़े से बड़े युद्धवीर होने के बाद भी जीत पांडवों की हुई, क्योंकि उनके पास मास्टर स्ट्रेटजी थी।

5 लीडरशिप: श्रेष्ठ पुरुष यानी सीनियर व्यक्ति जैसा आचरण या काम करते हैं, जूनियर वैसा ही आचरण, व्यवहार करते हैं। यानी जीवन में तरक्की के लिए व्यवहार कुशल होना जरूरी है, क्योंकि, आज जो हम सही या गलत करेंगे। समय आने पर दूसरे लोग, साथी भी वही करेंगे।

6 अपनों का साथ न छोड़ना: कृष्ण ने पांडवों, खासकर अर्जुन और द्रौपदी, इसके अलावा सुदामा का साथ देकर साबित कर दिया कि मुश्किल से मुश्किल में भी वो अपने भक्तों, मित्रों का साथ नहीं छोड़ते हैं। दोस्ती, आपसी संबंध, नाते रिश्तेदारी में अमीरी- गरीबी की कोई जगह नहीं होती।