सेमी-डायस्टोपियन दुनिया में ले जाता है इशिगुरो का नॉवेल

 28 Aug 2021 01:05 AM

क्लब लिटराटी ने काजुओ इशिगुरो की पुस्तक क्लारा एंड द सन पर अंशु वैश्य और निशि अग्रवाल के साथ चर्चा का आयोजन किया। चर्चा उपन्यास की कहानी और इसके लेखक, नोबेल पुरस्कार विजेता काजुओ इशिगुरो के दृष्टिकोण पर आधारित थी। बुकर पुरस्कार 2021 के लिए नॉमिनेटेड और बराक ओबामा समर रीडिंग लिस्ट 2021 में विशेष रूप से प्रदर्शित यह पुस्तक संडे टाइम्स बेस्टसेलर है। डॉ. सीमा रायजादा ने चर्चाकारों अंशु वैश्य और निशि अग्रवाल का परिचय कराया। निशि ने कहा कि शिगुरो जापान में जन्मे ब्रिटिश लेखक हैं, जिन्होंने उपन्यास की 9 रचनाएं लिखीं हैं। उन्हें दुनिया भर में कई पुरस्कार और सम्मान मिले, जिनमें साहित्य का नोबेल पुरस्कार और बुकर पुरस्कार भी शामिल हंै। उनकी किताब 'द रिमेंस आफ द डे' और 'नेवर लेट मी गो' पर फिल्में भी निर्मित हो चुकी हैं, जिन्हें काफी पसंद भी किया गया।

मानवीय रोबोट व इंसान की कहानी

अंशु ने चर्चा को आगे बढ़ाया और पुस्तक के कथानक और मुख्य विषयों के बारे में बताया। नायक क्लारा है, जो एक मानवीय रोबोट है, जिसे एक किशोर के साथी के रूप में डिजाइन किया गया है। इशिगुरो उसे एक कृत्रिम मित्र कहते हैं। एक दुकान में अपनी जगह से, वह उन लोगों के व्यवहार को ध्यान से देखती है जो ब्राउज करने के लिए आते हैं, और जो बाहर गली में गुजरते हैं। वह आशान्वित रहती है कि एक ग्राहक जल्द ही उसे चुन लेगा, जो तब होता है जब जोसी और उसकी मां स्टोर में आते हैं। वह अपने विशेष गुणों का उपयोग करके मानवीय भावनाओं को महसूस करना और उनसे जुड़ना भी सीखती है। वह सौर ऊर्जा से संचालित है और सूर्य को उसकी जीविका की शक्तियों में पूर्ण विश्वास के बिंदु तक पूजती है। इस पुस्तक में इशिगुरो अपने पाठकों को एक अर्ध-डायस्टोपियन दुनिया में ले जाते हैं, जो एक ही समय में पहचानने योग्य और डरावना है। अंशु ने पुस्तक का एक अंश भी पढ़ा, उसके उपरांत पाठकों का सवालजवा ब सत्र चला।