पढ़िए बच्चों का गला काटने वाले इंजीनियर का सुसाइड नोट, चार पेज में लिखी ‘बहुत मजबूरी...’

 28 Aug 2021 08:17 PM

भोपाल। राजधानी के मिसरोद इलाके में दो बच्चों का कटर से गला काटने और खुद जहर पीने वाले ठाकरे दंपती का सुसाइड नोट सामने आया है। इसमें उन्होंने अपनी वो बेबसी लिखी, जिसे पढ़कर हर किसी की आंखें नम हो गईं। इंजीनियर पति ने लिखा कि वह यह कदम बहुत मजबूरी... बहुत मजबूरी में उठा रहा है। इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं है। परिवार समेत मरने की वजह सिर्फ नौकरी ना होना है। घर की आर्थिक स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि आगे का भविष्य भी अंधकार में है। इस घटना में कीटनाशक पीने से इंजीनियर और गला कटने से उनके बेटे की मौत हो गई है। जबकि पत्नी और बेटी की हालत गंभीर है। पढ़िए पूरा सुसाइड नोट-

वास्ते पुलिस अधिकारी महोदय,
मैं रवि ठाकरे, रंजना ठाकरे, अपने बेटे चिराग ठाकरे और बेटी गुंजन ठाकरे के साथ मानसिक कष्टों के साथ विगत कई वर्षों से जीवन निर्वाह कर रहे थे, परंतु अब हम आर्थिक कारणों के साथ जिंदगी चलाने में असमर्थ हैं। हमारी आत्महत्या में किसी का कोई हाथ नहीं है। हम यह पूर्ण होश में लिखकर दे रहे हैं। हमारे पास कोई भी नौकरी नहीं है। कोई प्रॉपर्टी भी नहीं है और न कोई जीवन का उद्देश्य रह गया है। बच्चों तक का कोई अन्य सुविधा नहीं दे पा रहे अन्य बच्चों की तरह। हमारे पास भविष्य में केवल अंधेरा ही अंधेरा है।... मेरी पत्नी और मैं मानसिक रूप से दिमाग से केवल खाली हो चुके हैं। काम में मन नहीं लगता। बच्चों की फीस नहीं भर पा रहे हैं। हम इसलिए आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। मेरे बूढ़े सास-ससुर ने हमारे लिए बहुत कुछ किया है। वे 70-80 वर्ष के हैं। महाराष्ट्र में वर्धा जिले के आर्वी तहसील में रहते हैं। हमारा एक मकान सिग्नेचर 366 में G-303 है, जिसका पजेशन भी नहीं लिया है। वह स्टेट बैंक के पास गिरवी है। 2012 से किस्तें जमा कर रहे हैं, पर अब किस्तें जमा कर पाने में असमर्थ हैं। साढ़े 17 लाख रुपए का लोन लिया था। 8 सालों की किस्तें जमा कर चुके, पर मकान नहीं मिला। करीब 10 लाख लोन बाकी है।

हमारे सामने भूख, भविष्य, बीमारी, फीस, घर का खर्च, नौकरी और अन्य भुगतान जैसे मकान का किराया, पुस्तकें, कॉपियों का भरपूर खर्च मुंहबाए खड़ा है। जिसका सामना करने की शक्ति अब… मेरे (रवि ठाकरे) के सामने खड़ी हैं। मैं इन खर्चों का सामना नहीं कर पा रहा हूं। मेरे ऊपर किसी का कोई कर्ज नहीं है। सबसे बड़ी समस्या नौकरी है। मेरे पास न BPL कार्ड है। पत्नी ने घरेलू बिजनेस चालू किया था, जो कोरोना में बंद हो चुका है।

मेरे बच्चे कॉर्मल स्कूल में पढ़ते हैं। उनके कम प्रतिशत आए। पूरी मेहनत से उसने पढ़ाई की, लेकिन प्रतिशत कम आने पर भविष्य नहीं बना पाया। उनका भी भविष्य मैंने खराब कर दिया है। मैं डिप्लोमा इंजीनियर होने के बाद भी... सभी को देखते हुए। प्राइवेट नौकरी के कारण थोड़ी पगार में इज्जत से जी रहा था, पर मैं मजबूर हो गया हूं।
बहुत मजबूर… बहुत मजबूर
मेरी व्यथा को कोई समझ नहीं सकता। मैं सभी से सारे रिश्तेदारों से माफी मांगता हूं।

बिंदु एवं वैष्णवी: मुझे एलएन मालवीया कंसल्टेंसी से 3 माह से वेतन नहीं मिला है। जो कुछ बचा है, जो मिलने वाला है। वह हम कोरे चेक साइन कर रहे हैं। वह उनको किसी भी प्रकार दे देना, ताकि दोनों लड़कियों की शादी हो सके। बैंक कोई अड़चन खड़ी ना करे।

मृत्यु पूर्व बयान में ये हम गुजारिश करते हैं कि हो सके तो किस्तों पर जो मकान खरीदा है, उसका पजेशन एंश्योर्ड है। किस्तें माफ कर गुड्‌डू मामा के नाम कर देना, ताकि लड़कियों की शादी की जा सके। अन्य रास्ता नहीं होने पर यह भयानक कदम उठाया है। मृत आत्मा पर इतनी दया करना। 

इस डिप्रेशन के कारण हम दोनों का दिमाग कमजोर हो गया। मैं आंखों से कमजोर हो गया। बिना पूछे कोई काम नहीं कर सकता हूं। मेरी मानसिक हालत, मेरी पत्नी की मानसिक हालत खराब है। रोजगार संकट से त्रस्त होकर मैं स्वयं में और मृत्यू का वरण करने के लिए बाध्य हो गए हैं।

मृत्यु पूर्व घोषणा
मेरे पास जो भी बचा है, वह कमलाकर राव, भाउराव गावंडे या उनके पुत्र योगेश गावंडे के नाम, पैसा, सामान गाड़ी, वस्तु सुपुर्द कर रहा हूं। कृपया उन्हें सौंप दिया जाए। मकान मालिक से भी माफी मांगते हैं। क्या लिखूं, क्या न लिखूं समझ नहीं आ रहा है। क्या करूं… समझ नहीं सकता। गलतियां होंगी, लेकिन मृत्यु पूर्व बयान को सही समझकर उलझनों को सुलझा देना। माफी सहित

कुछ संबंधियों के नंबर और नाम लिखे हैं। फिर लिखा है कि आप सब मिलकर संभाल लेना। अंत में रवि ठाकरे और उनकी पत्नी रंजना रवि ठाकरे के सिग्नेचर हैं। 

 

 

 

 


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