सामुदायिक जुड़ाव से सालभर में घटे 4.54 लाख अति कम वजन के बच्चे

 29 Aug 2021 12:52 AM

भोपाल। कुपोषण के नाम पर बदनुमा दाग बन चुके मध्यप्रदेश में अब ‘कुपोषण’ घटने लगा है। हाल ही में विभागीय रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि प्रदेश में एक साल के भीतर 4.54 लाख बच्चे अति कम वजन के होने के दायरे से बाहर आ गए। सिर्फ 3 जिलों में ही संख्या बढ़ी है। कुपोषण कम करने में विभाग को आखिरकार समुदाय का सहयोग लेना पड़ा है। प्रदेश में प्रति एक हजार जीवित जन्म लेने वाले बच्चों में से 56 बच्चे अपना पांचवां जन्मदिन नहीं मना पाते हैं। यानि हर वर्ष पांच वर्ष से कम उम्र के लगभग एक लाख बच्चों की मौत हो जाती है। इनमें आधी मौतों का कारण कुपोषण होता है। प्रति एक हजार जीवित जन्म में से 35 बच्चों का जन्म के 28 दिन के भीतर मौत हो जाती है। शिशु मृत्युदर के मामले में प्रति एक हजार जीवित जन्म लेने वाले बच्चों में से 48 बच्चों की पहले जन्मदिन से पूर्व ही मौत हो जाती है। सरकारी तौर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार साल 2019-20 में अति कम वजन के बच्चों की संख्या प्रदेशभर में 13,51,130 थी जो अगले साल घटकर 8,96,485 हो गई। जबकि ऐसे ही बच्चों की संख्या वर्ष 2018-19 में 11,58,351 थी।

कोरोना काल में आंगनबाड़ी बंद थीं फिर बदलाव कैसे

अति कम वजन के बच्चों की घटती संख्या से सवाल भी खड़े होने लगे हैं। भोपाल के रामप्रकाश त्रिपाठी का सवाल है कि जब कोरोना काल में आंगनबाड़ी केन्द्र बंद थीं। ऐसे में कुपोषण की रμतार कैसे कम हुई?

यह है विभाग का अगला लक्ष्य

2030 तक मातृ मृत्यु अनुपात को प्रति एक लाख जन्म पर 70 से कम करना।

नवजात शिशुओं तथा 5 वर्ष से कम उम्र के उन बच्चों की मृत्यु के मामलों को समाप्त करना है।

नई रणनीति ने बदली तस्वीर

कोरोना काल में बच्चों को घर-घर टेक होम राशन की व्यवस्था की।

वार्ड से लेकर राज्य स्तर पर विभागों का समन्वय मजबूत किया।

97,135 आंगनबाड़ी केन्द्रों में विशेष पोषण ग्राम सभाएं कराई।

गंभीर कुपोषित बच्चों का सघन वजन अभियान चलाया।

बच्चे के जीवन की प्रथम 1000 अनमोल दिवस बचाने के लिए परिवार के लोगों को जागरुक किया। यानि गर्भावस्था के नौ महीने, विशेष स्तनपान के छह महीने और 7 से 24 माह की अवधि में ऊपरी आहार सुविधा पर फोकस किया।

अन्नपूर्णा पंचायत में प्रति सप्ताह 6 माह से 6 वर्ष के बच्चे के लिए समुदाय के सहयोग से खाद्य सामग्री को साझा कर बालभोज का आयोजन।

65,500 आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषण वाटिका तैयार की गईं।

मजरा, टोला, वार्ड स्तर पर सहयोगिनी मातृ समितियां बनाई ।

इन जिलों में कुपोषण सबसे ज्यादा

श्योपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, टीकमगढ़, दतिया, सीधी, शिवपुरी, खरगोन, शाजापुर, मुरैना, भोपाल और भिंड। लेकिन श्योपुर, झाबुआ और उमरिया जिलों में कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में 40 फीसदी तक सुधार आया है । यह प्रदेश में सबसे अधिक है।

जीवन के एक हजार दिवस पर किया बड़ा फोकस

समुदाय आधारित कार्यक्रम चलाए। मां और बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिनों पर फोकस किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर भेजा। मॉनीटरिंग सिस्टम मजबूत किया। हमार लक्ष्य है कि नई पोषण नीति के अनुसार वर्ष 2030 तक प्रदेश में कुपोषण को खत्म किया जा सके। स्वर्णिमा शुक्ला,संयुक्त संचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग

प्रदेशभर में अति कम वजन के बच्चों की स्थिति
वर्ष 2018-19               11,58,351
वर्ष 2019-20               13,51,130
वर्ष 2020-21               8,96,485
एक साल में कम हुए      4,54,645