एक साल में प्लास्टिक के 73 हजार कण निगल रहे हम

एक साल में प्लास्टिक के 73 हजार कण निगल रहे हम

सिडनी। एक इंसान सालभर में 73 हजार प्लास्टिक के बारीक कण निगल रहा है। यह खुलासा आस्ट्रिया की मेडिकल यूनिवर्सिटी आफ वियना ने अपनी एक रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इंसान के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक पहुंचने का सबसे बड़ा जरिया बोतलबंद पानी है। इसके अलावा भोजन के रूप में लिए जाने वाले समुद्री जीवों से भी प्लास्टिक इंसान के शरीर में पहुंचती है। यह प्लास्टिक आंतों को संक्रमित कर रहा है। इस शोध के प्रमुख डॉ. फिलिप के मुताबिक, पहली बार मानव मल का अध्ययन शरीर में पहुंची प्लास्टिक की मात्रा का पता लगाने में किया गया है। शोध मे यह स्पष्ट हुआ कि प्लास्टिक शरीर में कैसे पहुंचती है।

क्या होता है माइक्रोप्लास्टिक, किनमें पाया जाता है यह

यह प्लास्टिक या फाइबर के वह टुकड़े होते हैं जो आकार में बहुत छोटे होते हैं। यह 5 मिमी से भी कम आकार के प्लास्टिक या फाइबर के टुकड़े होते हैं। निजी देखभाल के उत्पादों में पाए जाने वाले माइक्रोप्लास्टिक या माइक्रोबीड्स एक मिमी से भी कम होते हैं। इनका प्रयोग सौंदर्य उत्पादों, साबुन, टूथपेस्ट, फेसवॉश, बाडीवॉश, स्क्रब में होता है।

► बोतलबंद पानी के ट्रांसपोर्टेशन के समय इसका टेम्परेचर मेनटेन रहे। बोतलें गर्म होने से कैंसरकारी तत्व पानी में घुल जाते हैं।

► प्लास्टिक के महीन कण शरीर में पहुंचकर जहरीले रसायन में तब्दील हो जाते हैं। ये रक्त प्रवाह में मिलकर लिवर अन्य हिस्सों में पहुंचते हैं।

► डॉ. फिलिप श्वॉबल का कहना है कि समुद्री जीव समंदर में फेंका गया कचरा खा जाते हैं। बाद में यह हमारी थालियों में पहुंच जाते हैं।

► पिछले माह डब्ल्यूएचओ ने इसे रोकने की पहल की थी। संगठन ने पेयजल से माइक्रोप्लास्टिक्स के संपर्क में आने वाले हर इंसान में होने वाले खतरों का विश्लेषण किया है।