आपके घरों में आ रहा यूरिन मिला पानी!

आपके घरों में आ रहा यूरिन मिला पानी!

भोपाल। श्यामला हिल्स फिल्टर प्लांट में वॉल्व मैन शराब के नशे में फिल्टर बेड में रोज यूरिन करता है। इसकी शिकायत एई से की है। लॉग बुक में साफ लिखा है, इसे हटाया जाए...। आम शहरी को चौंका देने वाली और निगम को शर्मशार करने वाली ये लाइनें फिल्टर प्लांट की लॉग बुक में ड्यूटी आॅफिसर ने लिखी हैं। हालांकि, इस मामले में जिम्मेदार अफसरों का रवैया टालमटोल और गुमराह करने वाला है। श्यामला फिल्टर प्लांट से रोजाना शहर में 20.43 एमजीडी पानी (8 करोड़ लीटर) सप्लाई किया जाता है। ये पानी साफ नहीं होता, क्योंकि पानी साफ करने वाला फिल्टर मीडिया बीते छल सालों से बदला नहीं गया। नतीजा बीते 6 सालों से फिल्टर प्लांट से लोगों के घरों तक गंदा पानी पहुंचता है। इसे लोग साफ कर इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन प्लांट से अब जो जानकारी सामने आई है वह न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि लोगों का भरोसा तोड़ने वाली भी है। चौंकाने वाली बात ये है कि जिस पानी को लोगों के घरों तक सप्लाई किया जा रहा है, उसमें पेशाब मिला है। रोजाना शराब के नशे में धुत्त फिल्टर प्लांट में तैनात वॉल्व मैन पानी साफ करने वाले फिल्टर मीडिया में पेशाब करता है। इस बात का खुलासा प्लांट में तैनात ड्यूटी इंचार्ज ने किया है। हालांकि इस खुलासे के बाद भी जिम्मेदारों ने मामले पर ध्यान नहीं दिया।

AE बोले- ऐसा नहीं हो सकता, फिर फोन बंद कर लिया

नगर निगम वॉटर वर्क्स के इंजीनियर राकेश निगम श्यामला हिल्स फिल्टर प्लांट के प्रभारी हैं। पीपुल्स समाचार ने उनसे फिल्टर बेड में वॉल्व मैन द्वारा यूरिन करने की बात लॉग बुक में दर्ज किए जाने के बारे में पूछा। इस पर उनका कहना था- ‘ऐसा नहीं हो सकता। हमने जब लॉग बुक की कॉपी उन्हें वॉट्स एप पर सेंड की तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद हमने उनसे कई बार संपर्क करने की कोशिश की तो फोन बंद कर लिया।

फिर दामन बचाने की कोशिश : इधर, फिल्टर मीडिया में पेशाब करने की बात जैसे ही इंजीनियर को मिली वह सकते में आ गए। अपना दामन बचाने की कोशिश रात में ही शुरू कर दीं। सूत्रों के मुताबिक रात में ही फिल्टर प्लांट में तैनात सभी कर्मचारियों को यह जानने के लिए तलब किया गया कि लॉग बुक की तस्वीर किसने खींची। आरोपी पर क्या कार्रवाई करेंगे, इसके बारे में नहीं सोचा।

फिल्टर मीडिया

इसमें रेत, कोयले और पत्थरों की कई परतें होती हैं। ये फिल्टर बेड में एक के ऊपर एक लगी होती हैं। ऊपरी परत में कच्चा पानी छोड़ा जाता है, जो परतों से छनता हुआ फिल्टर बेड में नीचे लगे नोजलों से स्टोरेज टैंक तक पहुंचता है। यहां से पानी सप्लाई टैंक में भेजा जाता है, जहां क्लोरीन ट्रीटमेंट के बाद सप्लाई की जाती है।

यह आपराधिक कृत्य

इस तरह के मामले में आईपीसी की धारा 268 और 277 के तहत एफआईआर कराई जा सकती है। अरोपी की गिरμतारी भी हो सकती है, साथ ही 6 महीने की सजा और जुर्माने का प्रावधान भी है। इसमें व्यक्ति जानबूझकर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहा है।