अब आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी, कमेटी तय करेगी किसे दिया जाएगा पुरस्कार

अब आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी, कमेटी तय करेगी किसे दिया जाएगा पुरस्कार

भोपाल उच्च शिक्षा विभाग में अब हर स्तर के अधिकारी-कर्मचारियों के पुरस्कार की नीति बनाई जा रही है। इन पुरस्कारों के लिए आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी तय करेगी कि किसे पुरस्कार दिया जाए। नई नीति में कुलपति, कॉलेज प्राचार्य और प्राध्यापकों से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल किए जाएंगे। विभाग द्वारा अभी तक दो बड़े पुरस्कार प्रायोजित किए गए हैं। इनमें पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मण सिंह गौड़ के नाम पर दिया जाने वाला पुरस्कार कॉलेज प्राचार्य, प्रोफेसर एवं स्टूडेंट्स के लिए है। हरि सिंह गौर पुरस्कार कुलपतियों के लिए है। दोनों पुरस्कारों के लिए क्राइटेरिया काफी सख्त है। इस कारण तीन साल में लक्ष्मण सिंह गौड़ अवॉर्ड नहीं दिया जा सका। पुरस्कार शुरू होने के बाद से मात्र एक बार ही यह दिया गया। हरि सिंह गौर पुरस्कार के लिए मात्र दो कुलपतियों ने आवेदन किया था, लेकिन दोनों ही क्राइटेरिया में नहीं आए। क्यों फेल हुई पुराने पुरस्कारों की नीतियां : अभी तक सरकारी स्तर पर जितने भी पुरस्कार दिए जाते रहे हैं, उनके लिए अधिकारी-कर्मचारियों को खुद पहल करनी होती थी। आवेदन न करने के चलते योग्य लोगों को पुरस्कार नहीं मिल पाता था।

कई बार नियमों में संशोधन : उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार एवं शिक्षक-छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए 2011 में स्व. लक्ष्मणसिंह गौड़ स्मृति पुरस्कार देने की घोषणा हुई थी। निर्धारित आवेदन प्रपत्रों में सभी के लिए 300 अंकों का प्रावधान है। पुरस्कार के लिए 75 फीसदी यानी 225 अंक लाना जरूरी है। घोषणा के बाद एक बार 2012 में ही यह पुरस्कार दिया गया था। इसके बाद योग्य उम्मीदवार न मिलने से 2014 में नियमों में बदलाव किया गया। हालांकि कोई भी प्रोफेसर एवं प्राचार्य 75 फीसदी अंक के पैमाने को पूरा नहीं कर सका। पिछले साल फिर नियमों में बदलाव किया गया।