अंकों और नामी संस्थान के टैग के पीछे नहीं भागा इसलिए मिली यह सक्सेस

अंकों और नामी संस्थान के टैग के पीछे नहीं भागा इसलिए मिली यह सक्सेस

आईएम भोपाल। भोपाल के अहमद सयान को सिलेक्शन यूएस की पांच टॉप यूनिवर्सिटी में मास्टर इन फाइनेंशियल इंजीनियरिंग कोर्स के हुआ है। अहमद वर्तमान में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ इंफॉर्मेंशन टेक्नोलॉजी (आईआईआईटी) बैंगलुरू में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग कर रहे हैं। अहमद को टॉप रैंक आईवी लीग (कोलंबिया यूनिवर्सिटी), यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले यूनिवर्सिटी, कानेर्गी मिलॉन यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया और यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन से आॅफर मिला है। अहमद भोपाल में डीपीएस के छात्र रहे और फिर साल 2014 में आईआईटी में सिलेक्ट हुए, लेकिन आईआईआईटी में सीएस ब्रांच जॉइन की। आईएम भोपाल से इंटरव्यू में अहमद ने बताया कि मैंने बचपन से पढ़ाई अंकों के लिए नहीं की और यही वजह है कि आईआईटी में 4000 वीं रैंक होने की वजह से कंप्यूटर साइंस में एडमिशन नहीं मिला तो मैंने अपनी ब्रांच से समझौता करने की बजाए किसी अन्य संस्थान से अपनी पसंद की ब्रांच में पढ़ने का इरादा किया और आईआईआईटी बैंगलुरू में एडमिशन लिया। यहां पहुंचने के बाद इतना सब कुछ एक्सप्लोर किया जिसकी कल्पना स्कूल में रहते हुए भी नहीं थी। स्कूल की पढ़ाई रियल वर्ल्ड से बहुत अलग है। स्टूडेंट्स को जब तक यह पता नहीं होगा कि वे कोई विषय किस वजह से पढ़ रहे हैं, तब तक उनकी रुचि विकसित नहीं होगी। खासतौ पर मैथ्स के मामले में। आम स्टूडेंट्स की तरह मुझे भी मैथ्स ज्यादा पसंद नहीं था लेकिन जब आईआईआईटी पहुंचा तो मैथ्स का एप्लिकेशन जाना। संस्थान में हर दिन का रियल वर्ल्ड के साथ कनेक्शन प्रैक्टिकली दिखाया तो समझ आया कि मैथ्स कितना जरूरी है। यह शुरूआत यदि स्कूल लेवल से हो जाए तो स्टूडेंट्स के मैथ्स के अल- अलग फील्ड में करियर बना सकते हैं। मेरे पिता रिजवान एफ सिद्दकी भेल में एजीएम और मम्मी असमा रिजवान प्रोफेसर पीपुल्स यूनिवर्सिटी हैं।

यह कोर्स का फायदा

इस कोर्स को करने के बाद इसका इस्तेमाल फाइनेंशियल इंडस्ट्री में किया जाता है। बैंकिंग सेक्टर, इंवेस्टमेंट बैंकिंग, फाइनेंशिल इक्विटी, म्यूचुअल फंड्स, फाइनेंशिल इंस्ट्रूमेंट्स की प्राइजिंग, डेरिवेटिव्स प्राइसिंग, वित्तीय नियमों के क्रियान्वयन, कॉपोर्रेट फाइनेंस, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट, रिस्क मैनेजमेंट, ट्रेडिंग और स्ट्रक्चर्ड प्रॉडक्ट्स आदि में फाइनेंशियल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल होता है। इसके विशेषज्ञ डेटा आधारित फाइनेंशियल मॉडल्स तैयार करने के लिए मार्केट ट्रेंड्स का विश्लेषण करते हैं और फाइनेंशियल थ्योरीज पर काम करते हैं। इसके लिए वे गणितीय फॉर्मूला, प्रोग्रामिंग और इंजीनियरिंग विधियों का इस्तेमाल करते हैं। इन प्रोफेशनल्स को क्वांट्स के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे सभी पैरामीटर्स को क्लियर करने के बाद अहमद सयान ने यह सफलता पाई।

  कैसे की तैयारी..

अपने ग्रेजुएशन सब्जेक्ट को तो बहुत अच्छे से पढ़ा ही इसके लिए किताबी नॉलेज से अलग यूएस इकॉनोमी, यूएस पॉलिटिक्स आदि विषयों को खाली समय में पढ़ा और इससे सवाल भी पूछे गए। कोर्स मटेरियल से हटकर पढ़ना बहुत जरूरी है यह स्कूल के बाद समझ आया। पढ़ाई के अलावा स्पोर्ट्स एक्टिविटीज और मूवी भी देखता रहा, इतना ही नहीं पावर लिफ्टिंग कॉम्पिटीशंस में भी भाग लिया क्योंकि रियल वर्ल्ड में किताबी ज्ञान से ज्यादा व्यक्ति के बिहेवियर, क्रिटिकल थिकिंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग अप्रोच, लीडरशिप, टीम वर्क और कम्युनिकेशन स्किल्स पर ज्यादा फोकस किया जाता है।

कैसे हुआ सिलेक्शन...

स्काइप इंटरव्यू के माध्यम से बिहवेरियल इंटरव्यू, टेक्नीकल इंटरव्यू, प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स को परखा गया। यह भी देखा गया कि किसी प्रॉब्लम को किस तरह सॉल्व किया जा रहा है जो कि साइकॉलोजिस्ट ने देखा।

क्या है फाइनेंशियल इंजीनियरिंग....

अहमद कहते हैं, मैं बर्कले या कोलंबिया से मास्टर्स इन साइंस एंड फाइनेंशियल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करूंगा। भारत में कोई भी यूनिवर्सिटी अभी तक फाइनेंशियल इंजीनियरिंग का कोर्स नहीं कर रही, जबकि यूएस में यह कोर्स 1995 से टॉप यूनिवर्सिटी शुरू कर चुकी हैं। कोर्स एक अलग तरह का कॉम्बिनेशन है, जिसमें डाटा साइंस, मैथ्मेटिक्स, फाइनेंशल, कंप्यूटर साइंस व स्टेटिस्टिकल साइंस शामिल हैं। सभी विषयों को मिलाकर यह एक कोर्स बना है। अपने नाम के बावजूद यह विषय इंजीनियरिंग की पारंपरिक फील्ड्स से संबंधित नहीं है।