बारिश से सुपर कॉरिडोर को गांवों से जोड़ने वाली सड़कों की हालत खस्ता

बारिश से सुपर कॉरिडोर को गांवों से जोड़ने वाली सड़कों की हालत खस्ता

इंदौर। करोड़ोें रुपयों की लागत से विकसित किए गए शहर के पश्चिम क्षेत्र की विकास रेखा सुपर कॉरिडोर से ग्राम लिंबोदी समेत अन्य गांवों को जोड़ने वाली सड़कों पर इन दिन सफर करना ग्रामीणों के लिए मुश्किलभरा हो गया है। पिछले दिनों हुई बारिश ने सुपर कॉरिडोर से जुड़ने वाली सड़कों की हालत बिगाड़कर रख दी है। गांवों की ओर जाने वाली सड़कें बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई है। गड्ढों में इतना पानी भरा गया है कि उसमें से निकलना किसी मुसीबत से कम नहीं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़कों को दुरुस्त करने के लिए मंत्री और आईडीए के अधिकारियों को फोटो समेत इसकी शिकायतें भी की गर्इं, लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हुई।

सड़कों के कारण कॉरिडोर की छवि हो रही प्रभावित

आर्थिक राजधानी का दर्जा रखने वाले इंदौर की पहचान काफी पहले से व्यापार और उद्योग-धंधों के बड़े केंद्र की रही है। पीथमपुर और देवास इंडस्ट्रियल एरिया और सांवेर इंडस्ट्रियल बेल्ट तो पहले से ही मशहूर है, अब सुपर कॉरिडोर इंदौर के विकास को नई पहचान दे रहा है। पुराने और नए इंदौर की कड़ी इस सुपर कॉरिडोर के आसपास आईटी, लॉजिस्टिक, मेडिकल और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित किए जा रहे हैं। यहां इन्फोसिस और टीसीएस जैसी दिग्गज आईटी कंपनियां जल्दी ही अपना काम शुरू करने जा रही हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित किए गए सुपर कॉरिडोर से गांवों की ओर जाने वाली सड़कों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कॉरिडोर की छवि प्रभावित हो रही है।

स्कूल बसों का आनाजाना हुआ मुश्किल

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम लिंबोदी, पालिया, बगाना, हातोद, बरदरी, पितावली, धतुरिया, अलवासा, खजूरिया, देपालपुर, पालाखेड़ी, माता बरेली, मेड़खेड़ी समेत करीब 20 गांव की सड़कें सुपर कॉरिडोर से जुड़ रही हैं। आईडीए द्वारा विकसित किए गए कॉरिडोर से कटने वाले गांवों की तरफ जाने वाले रास्ते की सड़कों की हालत बारिश ने बिगाड़कर रख दी है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि गांवों की तरफ की सड़कें बड़े- बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। इन गड्ढों में बारिश का पानी भरा हुआ है। ये ऐसी सड़कें हैं, जहां से रोज बच्चों की बसें आती-जाती हैं, लेकिन सड़कें ठीक नहीं होने के कारण बसों को काफी परेशानी हो रही है। बसों के अलावा दोपहिया वाहन चलाना मुश्किल हो रहा है। सड़कों पर गड्ढे भी इतने बड़े- बड़े हो गए हैं कि किसानों के टैÑक्टर भी नहीं निकल पा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वे मंत्री जीतू पटवारी तथा आईडीए के अफसरों को यह समस्या बता चुके हैं, लेकिन अभी तक समस्या ज्यो की त्यो बनी हुई है।