तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
तरुण तेजपाल

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने दुष्कर्म मामले में तहलका पत्रिका के पूर्व प्रमुख सम्पादक तरुण तेजपाल को सोमवार को करारा झटका देते हुए उनके खिलाफ बलात्कार के तय आरोपों को निरस्त करने से इन्कार कर दिया। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति बी आर गवई की खंडपीठ ने बॉम्बे उच्च न्यायालय की गोवा पीठ के फैसले में हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुए निचली अदालत को सुनवाई छह माह में पूरी करने का निर्देश दिया। गोवा पीठ ने तेजपाल के खिलाफ बलात्कार के आरोप तय करने के सत्र न्यायाधीश के फैसले को जायज़ ठहराया था। तेजपाल ने उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने आज याचिका खारिज करने के साथ ही यौन-उत्पीड़न मामले की सुनवाई पर लगायी रोक हटा ली और निचली अदालत को निर्देश दिये कि वह छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी करे। पीठ ने कहा, ‘‘हम मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ तय आरोपों को निरस्त करने के पक्ष में नहीं हैं। हम गोवा की संबंधित अदालत में चल रहे मुकदमे की सुनवाई पर लगी रोक भी हटाते हैं।’’ तेजपाल पर अपनी महिला सहकर्मी से दुष्कर्म और यौन-उत्पीड़न का आरोप है। सितम्बर 2017 में गोवा की निचली अदालत ने तेजपाल पर दुष्कर्म और यौन-उत्पीड़न और अन्य धाराओं के तहत आरोप तय किये थे, जिसे बॉम्बे उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने जायज ठहराया था।