आवारा जानवर :पशु मालिकों की शिकायत मिलने पर भी पुलिस नहीं करती एफआईआर

आवारा जानवर :पशु मालिकों की शिकायत मिलने पर भी पुलिस नहीं करती एफआईआर

जबलपुर ।   शहर की सड़कों से आवारा पशुओं के जमावड़े पर नगरीय निकाय एवं विकास मंत्री जयवर्धन सिंह द्वारा जताई गई नाराजगी और महापौर डॉ स्वाती सदानंद गोडबोले की धमकी कि मैंखुद डंडा लेकर सड़कपर आवारा जानवरों को खदेड़ूंगी के बाद नगर निगम का हांका गैंग खासा सक्रिय हो गया है। हर रोज ननि की कैटल वैन आवारा पशुओं को पकड़कर दयोदय पहुंचा रही है। पीपुल्स समाचार ने जब इस मामले में पड़ताल की तो कई ऐसे तथ्य निकलकर सामने आ ए जिन पर जिला सहित पुलिस प्रशासन को ध्यान देना जरूरी है। दयोदय स्थित गौशाला की क्षमता 15 सौ पशुओं की है,जबकि शहर मे हजारों की संख्या में आवारा पशु सड़कों पर है। ऐसे में पशु मालिकों पर सख्ती बेहद जरूरी है। नगर निगम में जब इस बारे में बातचीत की गई तो पता चला कि पशु मालिकों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी जाती है मगर इन शिकायतों पर एफआईआर कायम नहीं की जाती,जिसके कारण पशु मालिक नहीं चेत रहे हैं। यदि सख्त पुलिस कार्रवाई होने लगे और 10-20 पशु पालकों को जेल की हवा खानी पड़े तो बाकियों में भी यह संदेश जाएगा और लोग अपने पशुओं को सड़कों पर छोड़ने से डरने लगेंगे।

दूध निकालकर छोड़ देते हैं

ज्यादातर पशु मालिक गाय तो पालते हैं मगर वे इनका दूध निकालकर इन्हें खुला छोड़ देते हैं। ये गायें चौराहों या मुख्य मार्गों पर जहां-तहां डेरा जमा लेते हैं और यातायात प्रभावित करते हैं। यही हाल सांडों का है जो चौबीसों घंटे रोड पर नजर आते हैं। सब्जी मंडी,होटलों के आसपास और जहां-जहां भी खाने-पीने की चीजें इन्हें मुहैया हो सकती है वहां पर इनका जमावड़ा बना रहता है।

शूकर पालक हो जाते हैं हिंसा पर आमादा

नगर निगम ने जब-जब भी शूकर पालकों पर कार्रवाई करनी चाही तो ये हिंसा पर आमादा हो गए। दसियों बार इस तरह की घटनाएं हुर्इं जबकि नगर निगम के अमले को पिट कर आना पड़ा। हर बार एफआईआर दर्ज करवाई गर्इं,मगर शायद ही कभी कोई शूकर पालक जेल गया हो। ऐसे में नगर निगम के कर्मचारियों में हताशा का वातावरण बनता है और वे कार्रवाई करने में हिचकते हैं।

रिवॉल्वर तक निकाली गई

नगर निगम के सहायक स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर कार्यरत केके दुबे अपनी लायसेंसी रिवॉल्वर लेकर कार्रवाई में निकलते हैं। कई बार जब वे कार्रवाई में शामिल रहे और उनकी टीम पर हमला किया गया तो बेहिचक उन्होंने रिवॉल्वर निकालकर लहराई तो शूकर पालक भयभीत हुए। हालाकि नगर निगम अपने दलों को कोई शस्त्र नहीं देता।

नहीं करती पुलिस सहयोग

कलेक्टर की हिदायत के ब ावजूद कार्रवाई के लिए जाने वाली टीम को जैसे -तैसे पुलिस बल तो मुहैया करवा दिया जाता है मगर आपात् स्थिति में ये मददगार साबित नहीं होते बल्कि मूक दर्शक की तरह तमाशा देखते हैं। ऐसा विगत दिनों दमोहनाका चंडालभाटा में शूकर पकड़ने की कार्रवाई में सामने आ चुका है।