वाहन क्षेत्र में नरमी, मारुति ने अपने उत्पादन में कटौती की

वाहन क्षेत्र में नरमी, मारुति ने अपने उत्पादन में कटौती की

मुंबई। वाहन बनाने वाली मारु ति सुजुकी इंडिया ने नरमी को देखते हुए सितंबर में अपना उत्पादन 17.48 प्रतिशत घटा दिया। यह लगातार आठवां महीना है जब कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी ने अपना उत्पादन कम किया है। मारुति सुजुकी इंडिया ने शेयर बाजारों को दी सूचना में कहा कि कंपनी ने सितंबर महीने में 1,32,199 इकाइयों का उत्पादन किया जबकि एक साल पहले इसी महीने में यह संख्या 1,60,219 इकाई थी। पिछले महीने यात्री वाहनों का उत्पादन सालाना आधार पर 17.37 प्रतिशत घटकर 1,30,264 इकाई रहा जबकि सितंबर 2018 में यह संख्या 1,57,659 इकाई थी। कंपनी की आल्टो, न्यू वैगनआर, सिलेरियो, इगनिस, स्विμट, बालेनो और डिजायर समेत छोटी एवं काम्पैक्ट खंड की कारों का उत्पादन आलोच्य महीने में 98,337 इकाई रहा जो पिछले साल इसी महीने में 1,15,576 इकाई था । इसी प्रकार, विटारा ब्रेजा, एर्टिंगा और एस-व्रच्चॅस जैसे उपयोगी वाहनों का उत्पादन 17.05 प्रतिशत घटकर इस साल सितंबर में 18,435 इकाई रहा जबकि पिछले साल इसी महीने में 22,226 इकाइयों का उत्पादन हुआ था। अगस्त महीने में कंपनी ने उत्पादन 33.99 प्रतिशत कम किया था। कंपनी ने उस दौरान 1,11,370 वाहनों का उत्पादन किया था। टाटा मोटर्स के यात्री वाहनों का उत्पादन भी इस साल सितंबर में 63 प्रतिशत घटकर 6,976 इकाई रहा जो पिछले साल इसी महीने 18,855 इकाई था। मारुति सुजुकी, हुंदै, मंिहंद्रा एंड मंिहंद्रा, टाटा मोटर्स, टोयोटा और होंडा समेत सभी बड़ी वाहन कंपनियों की घरेलू बिव्रच्च्ी में दहाई अंक में गिरावट दर्ज की गयी। त्योहार शुरू होने के बावजूद वाहनों की मांग सुस्त है। 

पूरी दुनिया है मंदी की चपेट में : आईएमएफ

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत समेत पूरी दुनिया में मंदी गहराने की आशंका व्यक्त करते हुये मंगलवार को चेतावनी दी कि 90 प्रतिशत वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ चुकी है और इस साल विकास दर मौजूदा दशक की शुरुआत के बाद सबसे कम रह सकती है। एक सप्ताह पहले ही आईएमएफ प्रबंध निदेशक का पदभार संभालने वाली क्रिस्टलीना जॉर्जिवा ने अगले सप्ताह होने वाली आईएमएफ की वार्षिक बैठक से पहले यहाँ वैश्विक अर्थव्यवस्था के बारे में एक अभिभाषण में कहा, ‘‘दो साल पहले सकल घरेलू उत्पाद के लिहाज से दुनिया की 75 प्रतिशत अर्थव्यवस्था की विकास दर का ग्राफ ऊपर की तरफ बढ़ रहा था। आज करीब 90 प्रतिशत वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर घट रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय एक साथ मंदी का सामना कर रही है।आईएमएफ प्रमुख बनने के बाद अपने पहले अभिभाषण में उन्होंने व्यापार युद्ध को मंदी का बड़ा कारण बताया और कहा कि विकास में व्यापक गिरावट का मतलब है कि इस वर्ष विकास दर दशक की शुरुआत के बाद के निचले स्तर पर रहेगी।