चौराहों के विकास की धीमी चाल, बेखबर नगर निगम और स्मार्ट सिटी के जिम्मेदार

चौराहों के विकास की धीमी चाल, बेखबर नगर निगम और स्मार्ट सिटी के जिम्मेदार

जबलपुर । शहर केचौराहों के विकास की गति बेहद धीमी है। पूर्व निगमायुक्त वेदप्रकाश ने जब अपना कार्यकाल संभाला था तो उन्होंने चौराहों के विकास व लेफ्ट टर्न को अपनी प्राथमिकताओं में रखा था और इसके लिए पर्याप्त प्रयास भी किए थे। अब उनके स्थान पर आए वर्तमान निगमायुक्त आशीष कुमार स्मार्ट सिटी में व्यस्त हैं लिहाजा चौराहों पर ध्यान कम हो गया है। रानीताल,तीनपत्ती,घमापुर,दमोहनाक में अभी भी एक या दो तरफ जगह न मिलने के कारण चौराहा विकास का काम थम कर रह गया है। कहीं कोर्ट का स्टे तो कहीं खुद नगर निगम की उदासीनता अवरोध बन गई है। शहर का सबसे बड़ा चौराहा छोटी लाइन चौक को बनाया जा रहा है। इसे बनते हुए 5 साल हो रहे हैं मगर इसका काम पूरा होने का नाम ही नहीं ले रहा है। ब्लूम चौक पर गुप्ता होटल की तरफ व होमसाइंस से ब्लूमचौक के मार्ग पर अतिक्रमण हटाए हैं मगर सामने कैलाश आटोमोबाइल्स ने नाममात्र की जगह दी है।तीनपत्ती पर खुद नगर निगम का मार्केट चौड़ीकरण में अवरोध है। रानीताल में सुभाष मेडिकल व नरसिंह बिल्डिंग की तरफ केकब्जे नहीं हट पा रहे हैं। दमोहनाका में अब जाकर अवरोध खत्म हुए हैं और ननि को मुआवजा देकर जगह लेनी है। घमापुर का मामला भी कोर्ट में लंबित है। वहीं मदनमहल को भी आदर्श चौराहे के रूप में विकसित करने की योजना अभी तक कागजों पर ही है। शहर के इन आधे दर्जन प्रमुख चौराहों को विकसित करने में मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत है।

दमोहनाका चौराहा

शहर में जितने भी चौराहे बनाए गए हैं इनमें सबसे मंहगा चौराहा दमोहनाका का होगा। दमोहनाका में बल्देवबाग चेरीताल से दीनदयाल चौक की ओर जाने वाले लेफ्ट टर्न को फ्री किया जाना है। इसमे बाधक मकानों को हटाने की तैयारी ननि ने कर ली है। इन मकानों के स्वामियों को मुआवजा दिया जाना है। यह मुआवजा राशि 2.84 करोड़ रुपए नियत हुई है। यहां पर बाबू होटल की ओर के अतिक्रमण भी हटने हैं। वहीं मिलौनी गंज जानेवाले मार्ग पर मंदिर भी शिफ्ट किया जाना है। बरसों से इस चौराहे के निर्माण की प्रतीक्षा में शहर वासियों ने अब जितना काम हो चुका है उतने में ही गुजारा करते हुए चौराहे पर यातायात ट्रैफिक सिग्नल के सहारे चालू कर लिया है।

घमापुर चौक

घमापुर चौक यातायात की दृष्टि से आम नागरिकों को हलाकान करने वाला सबसे समस्याग्रस्त चौराहा है। यहां के चारों तरफ के प्रतिष्ठान नगर निगम के लिए सिरदर्द बने हैं। यहां पर कार्रवाईकरने पहुंचे अमले को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है। यहां पर भूमि स्वामियों ने हाईकोर्ट में रिट लगाकर स्टे ले रखे हैं। इनका निस्तारण हुए बिना घमापुरचौक का विस्तारीकरण संभव नहीं है। इसचौराहे पर यदि सभी भवन स्वामियों को मुआवजा देना पड़ा तो नगर निगम को खासी रकम का भुगतान करना होगा। सुरक्षा संस्थानों को अपनी नौकरी पर जाने वाले और वापस होने वाले कर्मियों को रोजाना यहां भारी जाम से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार जाम को लेकर यहां नियमित रूप से विवाद देखे जाते हैं।

छोटी लाइन चौराहा

20 हजार वर्ग फ़ीट में विस्तारित करीब 5 करोड़ से बनने वाले इस चौराहे का नाम आदि शंकराचार्य चौक नगर निगम रख चुका है। इस चौराहे को विगत वर्ष 2016 की शुरूआत में शहर का सबसे बड़ा चौराहा बनाने के लिए कहा गया था। यहां पर रेलवे की पेयजल पाइप लाइन शिफ्ट करने व वायरिंग अंडरग्राउण्ड करने की कवायद के बाद अब चौराहेपर पूरी तरहसे डामरीकरण तो कर दिया गया है और चारों ओर तिकोने आईलेण्ड बनाने का काम हो चुका है। यहां पर एक आईलेण्ड में ग्रीनरी लग चुकी है,18 प्रजातियों के पौधे भी लगा दिए गए हैं।यहां रोटरी का निर्माण भी हो चुका है। बताया गया था कि इस चौराहे की खासियत यह होगी कि यहां पर रोड पार करने दिव्यांगों के लिए सेंसर युक्त जेब्रा क्रासिंग होगी। यही तकनीक रानीताल चौराहे पर भी इस्तेमाल की जाएगी। रोटरी में रंग बिरंगी लाइट व फुहारे भी होंगे।

रानीताल चौराहा

रानीताल चौराहे को विकास की राह तकते 7 साल बीत चुके हैं। 5 महत्वपूर्ण रास्तों को जोड़ने वाला यह चौराहा कभी हैदराबाद के चारमीनार के पास के चौराहे की तर्ज पर बनाया जाना था मगर समय के साथ यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। निगमायुक्त ने पिंजरापोल गौशाला की भूमि का अधिग्रहण करते हुए यहां पर गढ़ा की ओर जाने के मार्ग पर चौराहे को चौड़ा करते हुए लेफ्ट टर्न बनाकर रोड बना दी है। यह चौराहा पहले की तुलना में काफी विस्तारित हो चुका है,मगर अभी भी सुभाष मेडिकल की ओर तथा नरसिंह बिल्डिंग की ओर के कब्जे टूटना बाकी हैं।अब नगर निगम ने इस चौराहे के उद्धार के लिए योजना तैयार की है।

तीन पत्ती चौराहा

चौराहा विकास के नजरिए से प्रयोगशाला बन चुका तीनपत्ती चौराहा नगर निगम के अपने ही मार्केट के कारण विकसित नहीं हो पा रहा है। यहां पर तत्कालीन महापौर ने रोटरी का सौंदर्यीकरण करवाकर लाखों रुपए फूंक दिए और उनका कार्यकाल खत्म होते ही नए महापौर ने इस रोटरी को तुड़वा दिया। यहां अब ट्रैफिक सिग्नल लगा है जिससे यातायात चल रहा है। चौराहे के विकास के लिए गौमाता चौक जानेवाले मार्ग पर दोनों तरफ के कब्जे तोड़े गए। मालवीय चौक से आकर नौदरापुल मार्ग के मोड़ पर भी पर्याप्त जगह है। केवल बसस्टेण्ड जाने वाले मोड़ पर नगर निगम का अपना मार्केट आड़े आ रहा है जिसे हटाने नगर निगम तैयार नहीं है। यही कारण है कि इस चौराहे का उद्धार नहीं हो पा रहा है।