रसूखदारों के आगे बौने भवन निर्माण के नियम

रसूखदारों के आगे बौने भवन निर्माण के नियम

ग्वालियर। भले ही निगम अधिकारियों द्वारा शहर में छोटे व अवैध निर्माण पर सख्ती दिखाकर तुड़ाई करने का खूब दिखावा किया जा रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि नियम केवल छोटे लोगों पर ही लागू होते हैं। जेयू की कुलपति हों या अपर परिवहन आयुक्त के निज सचिव के निर्माण पर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सब कुछ देखकर भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्यालय क्र. 14 के वार्ड क्रमांक 60 में स्थित डीबी सिटी में अवैध निर्माणकर्ता जेयू की कुलपति डॉ. संगीता शुक्ला ने 21 दिसंबर 2018 को जेड 14 डब्ल्यू 60 / 1183 / 2018/3 गुणा 3 व जेड 14 डब्ल्यू 60/ 1184/ 2018 / 3 गुणा 3 से भूखंड क्रमांक 79-80 पर जी प्लस टू की परमिशन ली थी, लेकिन निगम परमिशन की धज्जियां उड़ाकर अवैध निर्माण का खेल जारी है। इसी क्षेत्र में अवैध निर्माण करने के खेल में सिरोल तिराहे पर अपर परिवहन आयुक्त महेन्द्र सिंह सिकरवार के निज सचिव एनके खर्चे ने अपनी पत्नी नीलम खर्चे के नाम से अपने फार्म हाउस पर 17760 वर्गफीट पर दो अलग- अलग बिल्डिंग तैयार कर ली हैं। अब निगम से उन्हीं बने हुए भवनों की अनुमति मांगने की ऑनलाइन प्रोसेस शुरू कर दी है। निगम के जिम्मेदार अधिकारी हैं चुप रसूखदारों के अवैध निर्माण को लेकर निगम अधिकारियों ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। जानकारों की मानें तो जमीनी अधिकारियों से लेकर मुख्यालय में बैठे अधिकारियों तक को अवैध निर्माण की पूरी जानकारी है। उन्हीं के इशारे पर अवैध निर्माण करने के बाद परमिशन लेने का खेल शुरू हुआ है।

केस 1

जेयू कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला व अन्य द्वारा डीबी सिटी के प्लांट क्रमांक 79-80 पर अलग-अलग परमिशन ली गई, लेकिन मौके पर भूखंडों का निर्माण क्लब कर किया जा रहा है। नियमानुसार टीएंडसीपी से भूखंड क्लब कर निर्माण के लिए परमिशन लेनी थी, लेकिन निगम से दो प्लॉटों को मिलाकर अवैध निर्माण जारी है। साथ ही जी प्लस टू की परमिशन की जगह अन्य μलोर की छत डालने की तैयारी है।

केस 2

अपर आयुक्त परिवहन के निज सचिव एनके खर्चे की पत्नी नीलम खर्चे के नाम से सिरोल तिराहे पर अपने फार्म हाउस में 17760 वर्गफीट पर अवैध निर्माण के चलते दो बिल्डिंग तैयार कर ली गई हैं। अब बिना अनुमति के बनी इन्हीं दोनों बिल्डिंगों की परमिशन के लिए दस्तावेज लगाकर मांग की जा रही है। साथ ही जमीनी अधिकारियों को पुराने परिवहन विभाग में रहे अधिकारियों का डर भी दिखाया जा रहा है।