आटो सेक्टर को राहत, कार बनाने को सस्ती कीमत पर मिलेगी स्टील

आटो सेक्टर को राहत, कार बनाने को सस्ती कीमत पर मिलेगी स्टील

नई दिल्ली। आटो कंपनियों को आर्थिक सुस्ती के दौर में कुछ राहत मिल सकती है। दरअसल स्टील कंपनियों ने आॅटो सेक्टर को सस्ती दरों पर स्टील मुहैया कराने का ऐलान किया है। स्टील कंपनियों की मानें, तो चालू वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी छमाही में आटो कंपनियों को 11 से 14 प्रतिशत कम कीमत पर स्टील आफर की जा रही है। हालांकि इसके लिए आटो कंपनियों को स्टील कंपनियों के साथ अधिकतम 6 माह तक का करार करना होगा। मौजूदा वक्त में कुछ आटो कंपनियां इन आफर का फायदा उठा रही हैं। वहीं बाकी कंपनियां करार को लेकर बातचीत के दौर में हैं। स्टील कंपनियों के मुताबिक, उनके लिए आटो इंडस्ट्री एक अहम स्टेकहोल्डर है। ऐसे में आर्थिक सुस्ती के दौर में आटो इंडस्ट्री का सपोर्ट किया जाना चाहिए। खासकर जब वो चनौतीपूर्ण माहौल से गुजर रही हों।

कीमत में कटौती

सूत्रों के मुताबिक, दूसरी छमाही में कॉन्ट्रैक्ट के तहत स्टील की कीमत में 6000 रुपए प्रति टन तक की कटौती की गई है। आटो इंडस्ट्री को दो तरह की स्टील सप्लाई की जाती है। एक सीआरसीए होती है, जिसे 48 हजार रुपए प्रति टन के हिसाब से आटो इंडस्ट्री को सप्लाई किया जाता है, जिसकी मार्केट वैल्यू 54 हजार रुपए प्रति टन है। दूसरी तरह की स्टील एचआर है, जो 38 हजार रुपए प्रति टन के हिसाब से मौजूदा वक्त में आटो कंपनियों को सप्लाई की जा रही है। जबकि इसका मार्केट वैल्यू 44 हजार रुपए प्रति टन है।

हुंडई उतारेगी सस्ती कारों की लंबी रेंज

हुंडई भारत में अगले साल तक करीब 5 नई कार लॉन्च करेगी। साथ ही कुछ फेसलिμट कारों को भी पेश करेगी। जिन कारों की लॉन्चिंग होगी, उसमें एसयूवी क्रेटा, वर्ना का फेसलिμट वर्जन भी शामिल है। हुंडई मोटर्स इंडिया के एमडी और सीईओ एसएस किम की मानें, तो भारतीय आटो सेक्टर साल 2020 की दूसरी छमाही में रμतार पकड़ेगा। हुंडई की तरफ से भारतो में इलेक्ट्रिक कारों के लंबी भी पेश की जाएगी।

लंबी रेंज होगी पेश

हुंडई ने इस साल अपनी इलेक्ट्रिक कार कोना को लॉन्च किया है, जिसकी कीमत 23 लाख रुपए है, जो कि सीमित आय वर्ग वाले लोगों के लिए है। ऐसे में कंपनी सस्ती कार लॉन्च करेगी। कंपनी ने कहा कि वो भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों की मुहिम के साथ है। हालांकि कंपनी का यह भी मानना है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर न के बराबर है। देश में मौजूदा एक हजार चार्जिंग स्टेशन बहुत ही नाकाफी हैं।