सवारी-ताजिए पहुंचे रानीताल कर्बला, शियाओं ने किया मातम

सवारी-ताजिए पहुंचे रानीताल कर्बला, शियाओं ने किया मातम

जबलपुर ।  शहादत के पर्व मुहर्रम की मंगलवार को दस तारीख योमे आशूरा पर रानीताल कर्बला में सवारी ताजिये ठंड करने के साथ शालीनतापूर्वक समापन हो गया। मोहर्रम के दौरान कौमी एकता तथा साम्प्रदायिक सद्भाव के अनूठे नजारे नजर आए। अपरान्ह जुहर बाद नगर के विभिन्न अंचलों से सवारी ताजियों के जुलूस निकलना शुरू हुए। जुलूस में लगभग 300 सवारियां तथा 40 ताजिये शामिल थे। निकले सामूहिक जुलूस मंगलवार बाद नमाज जुहर 2.30 बजे नगर के विभिन्न अंचलों से सवारी- ताजियों के जुलूस निकाले गए। मुस्लिम बहुल क्षेत्र से बड़ी तादाद में लंगर बांटने वाले वाहन जुलूस में शामिल रहे। बहोराबाग, चारखंबा, मछली मार्केट, मिलौनीगंज चौक, कोतवाली, कमानिया, फुहारा, निवाड़गंज, बल्देवबाग, आगा चौक होते हुए जुलूस रानीताल कर्बला पहुंचा जहां परंपरानुसार सवारी-ताजिये ठंडे किये गये। मुμती-ए-आजम हजरत मौलाना मुहम्मद हामिद अहमद सिद्दीकी ने मुहर्रम के जुलूस का नेतृत्व किया। सदर बाजार- छावनी क्षेत्र सदर के सवारी-ताजियों का सामूहिक जुलूस अपरान्ह प्रारंभ हुआ। सदर बाजार की गलियों में गश्त करने के बाद शिवाजी मैदान होते हुए रानीताल कर्बला पहुंचा। उपनगरीय क्षेत्र- गढ़ा के सवारी ताजियों का जुलूस जुहर की नमाज अदायगी के बाद निकाला गया। छोटी बजरिया, आनंद कुंज, गढ़ा बाजार, त्रिपुरी, देवताल से ताजिया व सवारियां सूपाताल कर्बला पहुंचीं जहां सवारी- ताजिये ठंडे किये गए। जुलूस में हुसैनी एकता कमेटी, नूरानी नवजवान कमेटी द्वारा लंगर बांटा गया। मूए मुबारक की ज्यारत- रानीताल आगा चौक स्थित हजरत मिर्जा आगा मोहम्मद साहब की दरगाह में दसवीं मुहर्रम को अपरान्ह हजरत मौला अली, हजरत इमाम हसन, हजरत इमाम हुसैन के मूए मुबारक की जियारत कराई गई। ईदगाह कलां रानीताल में 10वीं मुहर्रम को सायं आशूरा के रोजेदारों के वास्ते रोजा अμतार का एहतेमाम किया गया। अμतारोपरांत मगरिब की सामूहिक नमाज अदा की गई। जामा मस्जिद सदर में हाजी मो. युनुस ताज ब्रादरान की जानिब से रोजा अμतार कराया गया। कोतवाली मस्जिद तथा आगा दरगाह में सायं रोजा अμतार कराया गया।

मुसलमान समझें कुरआन को

शिया जामा मस्जिद जाकिर अली में सुबह 7 बजे शिया बंधुओं ने आमाले आशूरा अदा किए। तत्पश्चात गलगला स्थित शिया इमामबाड़ा में मातमी जुलूस निकला जो फूटाताल चौक, खटीक मोहल्ला, सुनरहाई होता हुआ कोतवाली थाने के सामने पहुंचा जहां बरेली से तशरीफ लाए मौलाना मो. मीसम ने तकरीर पेश की। उन्होंने बच्चों व नौजवानों को आधुनिक शिखा पर जोर दिया और कहा कि चंद्रयान-2 जिस मकाम तक पहुंचा वो हमारे लिए गर्व की बात है। आपने अपने वैज्ञानिकों की प्रशंसा कर मुसलमानों से कहा कि तुम्हारे पास तो वाले किताब और नुसखे मौजूद हैं जो विश्व में किसी कौम के पास नहीं है। कुरआन में जमीनों आसमपान के सारे रहस्य मौजूद हैं लेकिन मुसलमान को कभी कुरआन को समझने की फुरसत ही नहीं मिलती जब वो मदरसे में कुरआन की शिक्षा हासिल करते है तो आधुनिक शिक्षा से दूर हो जाता है। उन्होंने दावा किया कि अगर आसमानों पर फतह चाहते हो तो कुरआन पर रिसर्च करो। तकरीर के बाद शिया बंधुओं ने नोहों पर मातम किया। सुजाअत रिजवी, शमशुल रिजवी, सुज्जू मंडलवी, काजिम रानू, वाकियाते कर्बला पर बड़े दर्द भरे और मार्मिक नोहे पढ़ रहे थे। वहीं शिया बंधु छाती पर हाथ मारकर मातम कर रहे थे। कुछ नवजवान जंजीरों पर लगी छुरियों को अपनी पीठ पर मार रहे थे। जुलूस का समापन दोपहर 2 बजे हुआ। शिया संस्था सचिव बाबा जैदी ने जुलूस मार्ग में आमजन के सहयोग का आभार व्यक्त किया।