लोग सोचें हमारा है भोपाल, तब होगा शहर का विकास

लोग सोचें हमारा है भोपाल, तब होगा शहर का विकास

भोपाल। जब मैं भोपाल का महापौर बना, तो शहर का बेटा होने के कारण मेरे दिल में शहर के लिए बहुत कुछ कर गुजरने की हसरत थी। बहुत संतोष है कि इसमें से काफी कुछ कर भी सका। मेरा हमेशा मानना रहा है कि विकास के कामों में राजनीति आड़े नहीं आनी चाहिए। मैंने शहर से जुड़े किसी भी मामले में यह नहीं देखा कि वहां भाजपा का पार्षद है या कांग्रेस का। यह कहना है- भोपाल शहर के महापौर आलोक शर्मा का, जिनका कार्यकाल 19 फरवरी को खत्म होने जा रहा है। पीपुल्स समाचार के कार्यालय में आए आलोक शर्मा ने विशेष बातचीत में कहा कि हर शहरवासी से मेरा आग्रह है कि इस शहर ने आपको सब कुछ दिया है, आप भी इसके लिए कुछ ना कुछ जरूर करें। भोपाल के लोगों के भीतर यह भावना होना चाहिए कि सबसे अच्छा हमारा भोपाल। महापौर आलोक शर्मा का कार्यकाल 19 फरवरी को खत्म हो रहा है। पांच साल महापौर रहे शर्मा शहर को सफाई में नंबर 2 की पोजीशन तक ले गए, तो राजा भोज केबिल स्टे ब्रिज जैसी सौगातें भी दीं। लेकिन कई प्रोजेक्ट ऐसे भी हैं जो रह गए, जिन्हें वे करना चाहते थे। उन्हें दर्द है कि स्मार्ट सिटी बनाने में महापौर को शामिल नहीं किया गया, जबकि प्रपोजल बनने तक उनकी भूमिका थी। उन्होंने पीपुल्स समाचार के दफ्तर में आकर अपने राजनीतिक और निजी जीवन से जुड़ी कई बातें शेयर कीं। कुछ अंश...

►सवाल: 5 साल के कार्यकाल में आपने बहुत से काम किए, लेकिन ऐसे कौन से काम हैं जिनको नहीं कर पाने का आपको दुख है?

जवाब: भोपाल में मेट्रो से ज्यादा अगर किसी चीज की जरूरत है तो वह है ग्रेड सेपरेटर, फ्लाईओवर और अंडरब्रिज, ताकि कनेक्टिविटी बेहतर हो सके। लेकिन इनके लिए हमेशा फंड की कमी रही। इंदौर-होशंगाबाद रोड को जोड़ने के लिए बड़े ताल के ऊपर से होते हुए 650 करोड़ की लागत वाले फ्लाईओवर का प्लान था। लेकिन फंड का इंतजाम नहीं हो सका। इसका मलाल रहेगा। हमीदिया रोड पर अहमदाबाद की तर्ज पर बस स्टैंड बनाने की डीपीआर बनी थी। लेकिन वित्त विभाग में फाइल अटकी रही। भाजपा सरकार में फाइल राज्य शासन के पास गई। नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह भी मानते हैं कि प्रोजेक्ट अच्छा है, लेकिन लालफीताशाही के चलते बस स्टैंड नहीं बन सका।

►सवाल: पहले के भोपाल और अब के शहर में क्या अंतर देखते हैं?

जवाब: मैंने जो बदलाव देखा है, वह है साफ-सफाई का, स्वच्छता का। 2016 में 75 शहरों ने स्वच्छ भारत सर्वे में हिस्सा लिया। इसमें भोपाल 21 नंबर पर आया। 2017 में 500 शहरों ने हिस्सा लिया, भोपाल दो नंबर पर आया। हमने जो सबसे बड़ा बदलाव किया वह कि शहर को डस्टबिन फ्री कर दिया।

►सवाल: सरकार बदलने से कामों में दिक्कत आ रही है?

जवाब: 39 करोड़ के आर्च ब्रिज का 95% काम हो गया है। कांग्रेस के कुछ नेता जिन्होंने 30 हजार वर्गफीट जमीन पर कब्जा कर रखा है, वे तीन मकान तोड़ने में बाधा डाल रहे हैं। हमने प्रस्ताव पास कर दिया, लेकिन अधिकारी मकान हटाने के लिए नोटिस जारी नहीं कर रहे। मकान हटते हैं कमला पार्क, टीटी नगर सड़क का 30 फीसदी ट्रैफिक डायवर्ट हो जाएगा। 32 करोड़ की लागत से बन रही स्मार्ट रोड के लिए 139 लोगों को शिफ्ट किया। लेकिन 32 परिवार राजनीतिक संरक्षण में अड़ंगा लगा रहे हैं। इससे 100 मीटर रोड नहीं बन पा रहा।

►सवाल: सरकार बदलने से बड़ा नुकसान क्या हुआ?

जवाब: भाजपा की सरकार जाने से भोपाल की चौपाल बंद हो गई। इसमें 5 से 10 हजार लोग आते थे। उनकी समस्याओं का निराकरण तुरंत होता था, लेकिन अब सरकार ने अधिकारियों को मना कर दिया। चौपाल में अधिकारी नहीं आते तो महापौर बैठकर क्या करेगा।

►सवाल: भाजपा की सरकार से कोई शिकायत ?

जवाब: जब देश में स्मार्ट सिटी का कॉन्सेप्ट आया था। तब हमारी कोशिश थी कि पहली 20 स्मार्ट सिटीज में भोपाल शामिल हो जाए। ये सौगात हमें मिली। लेकिन विडंबना है कि मेयर को स्मार्ट सिटी से बाहर कर दिया गया। स्मार्ट सिटी का चेयरमैन कलेक्टर को बनाया गया। मेयर को कहा गया कि आप अपना एक प्रतिनिधि स्मार्ट सिटी में दीजिए, पर दुर्भाग्य है कि हमारी सरकार चली गई और मेरे बोलने पर भी एडवाइजरी बोर्ड नहीं बना। अधिकारी मर्जी के काम कर रहे हैं।

►सवाल: कैसी मनमानी कर रहे हैं अफसर?

जवाब: सायकिल ट्रैक को ही ले लीजिए ये बेवजह बनाया गया है। मैं पहला महापौर हूं जिसने विरोध किया था। मुझे लगता है कि जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग हो रहा है। मेरा कहना है कि साइकिल ट्रैक बनाइये लेकिन पहले शहर को इसके लिए तैयार कीजिए। स्मार्ट सिटी में भ्रष्टाचार हुए हैं इसकी जांच होनी चाहिए।

►सवाल: छुट्टी लेते हैं कभी ?

जवाब: हां, 25 दिसंबर को 10 दिन के लिए भारत या बाहर कहीं जाता हूं। उस वक्त महापौर नहीं होता। सिर्फ परिवार को समय देता हूं।

►सवाल: दिन भर राजनीतिक जीवन में रहते हैं, घर परिवार को कैसे समय देते हैं?

जवाब: 1998 में डॉली शर्मा से शादी हुई। मैंने उन्हें पहले बता दिया था कि मैं सार्वजनिक जीवन में हूं। अधिकारी नहीं, जो परिवार को पूरा समय दे पाऊं। कई बार लगता है कि बच्चों के साथ फिल्म देखने नहीं जा पाता। एक किस्सा है, शादी के दूसरे दिन ही रात 1 बजे कुछ लोग किसी काम से आए। मां ने मना किया, लेकिन वे नहीं माने। पत्नी को 10 मिनट में आने का बोलकर गया। सुबह 5 बजे लौटा तो पत्नी की आंखों में आंसू थे। उन्हें समझाया। तब से उनका पूरा सपोर्ट मिलता है।

►सवाल: कोई ऐसा काम जिसका खास तौर पर उल्लेख करना चाहते हों?

जवाब: हां, रानी कमलापति की आदमकद प्रतिमा बनवाई है, जिसका राजनीतिक कारण से अनावरण नहीं होने दिया जा रहा। मनुआ भांड की टेकरी पर भारत माता के सबसे बड़े मंदिर का निर्माण करा रहे हैं। जहां तमाम स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों की प्रतिमाएं होंगी। यह अपने आप में अनूठा होगा।