जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए लोग कर रहे मौत का अहसास

जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए लोग कर रहे मौत का अहसास

सियोल। दक्षिण कोरिया में लोग जिदंगी को बेहतर ढंग से समझने के लिए मौत का अहसास कर रहे हैं। पिछले सात साल में करीब 25000 लोग जीवित रहते अंतिम संस्कार की प्रक्रिया से गुजर चुके हैं। लिविंग μयूनरल की पेशकश ह्वोवोन हीलिंग कंपनी ने 2012 में शुरू की थी। कंपनी का दावा है कि लोग स्वेच्छा से हमारे पास आ रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि जीवन खत्म होने से पहले मौत का एहसास करके वे अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं। इसमें 15 से 75 साल की उम्र तक के लोगों ने हिस्सा लिया। 

यह है पूरी प्रक्रिया

लिविंग μयूनरल के लिए आने वाले लोग 10 मिनट तक एक बंद ताबूत में कफन ओढ़कर लेटे रहे। इससे पहले उनके अंतिम संस्कार की फोटो ली गईं और उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा को लिखा। इस दौरान वे सभी रस्में पूरी की जाती हैं, जो किसी व्यक्ति की असल मौत के वक्त होती हैं। 

मौत के बारे में सीखना महत्वपूर्ण है आसन

मेडिकल सेंटर के पैथोलॉजी विभाग के एक डॉक्टर प्रोफेसर यू यूनसाइ ल ने बताया कि कम उम्र में भी मौत के बारे में सीखना और तैयारी करना महत्वपूर्ण है। यू मृत्यु पर एक किताब लिख चुके हैं। 

बदल जाता है दृष्टिकोण

एक बार जब आप मौत को महसूस कर लेते हैं तो उसे लेकर अलर्ट हो जाते हैं। तब आप जीवन में एक नया दृष्टिकोण अपनाते हैं। चो ने हाल ही में ह्वोवोन हीलिंग सेंटर के डाइंग वेल प्रोग्राम में लिविंग μयूनरल को अनुभव किया। - चो जे-ही, (75 वर्षीय बुजुर्ग) 

मैं खुद को समझ पाया ताबूत के अंदर

मैंने खुद को समझा। अक्सर मैं दूसरों को अपने कॉम्पिटिटर के तौर पर देखता था। मैंने देखा कि मैं नौकरी के बाजार में जाने के बजाय स्नातक करने के बाद अपना व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहा हूं। - चोई जिन-कुयु (28 वर्षीय छात्र) 

दक्षिण कोरिया में आत्महत्या की दर ज्यादा

आॅर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को- आॅपरेशन एंड डेवलपमेंट्स बेटर लाइफ इंडेक्स के 40 देशों में किए गए सर्वे में दक्षिण कोरिया का 33वां स्थान है। लोगों को शिक्षा और रोजगार की उम्मीदें हैं, जो खराब अर्थव्यवस्था और बढ़ती बेरोजगारी से गिर रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, साल 2016 में दक्षिण कोरिया में आत्महत्या की दर प्रति एक लाख लोगों में 20.2 थी, जो वैश्विक औसत (10.53) का लगभग दोगुना है।