1 मिनट में 72 के बजाय 80 बार धड़क रहा हमारा दिल

1 मिनट में 72 के बजाय 80 बार धड़क रहा हमारा दिल

कोलकाता। आमतौर पर लोगों का हृदय एक मिनट में औसतन 72 बार धड़कता है। लेकिन इंडियन हार्ट स्टडी (आईएचएस) ने दावा किया है कि भारतीयों के हृदय की गति औसत से ज्यादा है। यह गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहा है। भारतीयों का हृदय एक मिनट में 80 बार धड़कता है। इस अध्ययन में शोधकतार्ओं ने देश के 15 राज्यों के 355 शहरों में रह रहे 18,918 लोगों को शामिल किया। इसमें महिलाएं भी शामिल थीं। 

हाइपरटेंशन को कम करने में मिल सकती है मदद

यह अध्ययन वर्ष 2018 में अप्रैल के बाद अगले वर्ष जनवरी के बीच 19 डॉक्टस ने किया। उन्होंने ब्लडप्रेशर कम करने वाली दवाओं के बारे में पुनर्विचार करने की भी जरूरत बताई। आईएचएस समन्वयक डॉ. सौमित्र कुमार ने कहा कि इस अध्ययन से हमें भारतीयों के हृदय गति की उच्च दर को कम करने के साथ-साथ व्हाइट कोड हाइपरटेंशन और मास्क्ड हाइपरटेंशन को कम करने में मदद कर सकता है। 

खतरनाक है मास्क्ड हाइपरटेंशन :

मास्क्ड हाइपरटेंशन उस स्थिति को कहते हैं जब मरीज डॉक्टर के पास जाकर रक्तचाप की जांच कराता है तो वह सामान्य रहता है, लेकिन घर पर जांच करने पर वह हमेशा उच्च रहता है, जबकि व्हाइट कोट हाइपरटेंशन में परीक्षण के दौरान रक्तचाप सामान्य से कुछ ज्यादा रहता है। 

बढ़ते हैं किडनी और हृदय संबंधी रोगों के जोखिम :

शोधकतार्ओं ने कहा कि व्हाइट कोट हाइपरटेंशन में कई बार जांच में सही आंकड़े न मिल पाने के कारण मरीज अनावश्यक दवाएं लेना शुरू कर देते हैं। इससे उन्हें और ज्यादा नुकसान होता है, जबकि मास्क्ड हाइपरटेंशन का निदान आसान नहीं होता। अनावश्यक दवाओं से हृदय, मस्तिष्क की बीमारियां होती हैं। लगातार बढ़ रहे मामले डॉक्टर कुमार ने कहा किपहले माना जाता था कि 50 वर्ष के व्यक्तियों में हार्ट अटैक आता है, लेकिन अब तो 30 की उम्र में भी कई लोग इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आने लगे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण तनाव है। अध्ययनों में पाया गया है कि तनाव के कारण मस्तिष्क से जो रसायन स्रावित होते हैं, वे हृदय की पूरी प्रणाली खराब कर देते हैं, जिससे हृदय संबंधी कई बीमारियां घेर लेती हैं।