एक बाजार, पांच मंत्री, पांच आंदोलन फिर भी अफसरों पर कोई असर नहीं

एक बाजार, पांच मंत्री, पांच आंदोलन फिर भी अफसरों पर कोई असर नहीं

इंदौर। कमलनाथ सरकार के पांच मंत्रियों, पांच आंदोलन, मेयर तथा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष के प्रयासों के बाद भी सीतलामाता बाजार को कोई नहीं बचा सकेगा। इसके अलावा व्यापारियों और रहवासियों के विरोध का निगम के अफसरों पर कोई असर नहीं पड़ा और यह कह दिया कि अब रक्षाबंधन के बाद स्मार्ट सड़क के लिए तोड़फोड़ शुरू हो जाएगी। गोराकुंड से सीतलामाता बाजार तक प्रस्तावित 60 फीट सड़क चौड़ीकरण को लेकर निगम ने आधे हिस्से में नोटिस जारी कर दिए हैं, जबकि कुछ हिस्सों में नोटिस जारी किया जाना है। शनिवार को सीतलामाता बाजार पहुंचे अपर आयुक्त के समक्ष व्यापारियों और रहवासियों ने अपने घर और दुकान बचाने का अंतिम प्रयास किया, लेकिन अधिकारी ने साफ कह दिया कि तोड़फोड़ के लिए आप तैयार रहें। सीतलामाता बाजार व्यापारी एसोसिएशन के सचिव पप्पू सीखची ने बताया कि 60 फीट सड़क चौड़ी करने से कई व्यापारियों व रहवासियों के मकान-दुकानें साफ हो रही हैं। इससे व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा है। व्यापारियों ने अधिकारियों को सुझाव भी दिया था कि निगम 60 के बजाय 50 फीट सड़क चौड़ी कर दे। इससे कई व्यापारियों की दुकानें बच जाएंगी, लेकिन अफसरों ने उनकी एक नहीं सुनी। व्यापारियों ने मानी हार एसोसिएशन के सचिव पप्पू सीखची ने बताया कि अब हमें यह लगने लगा है कि अब कुछ भी नहीं होगा। शनिवार को अपर आयुक्त संदीप सोनी ने सीतलामाता बाजार पहुंचकर व्यापारियों से चर्चा की। जब हमने अपर आयुक्त को बताया कि निगम ने बाजार में जो सेंटर लाइन डाली है वह गलत तरीके से डाली गई। इस पर निगम अधिकारी सोनी ने बताया कि लाइन डालने में कोई गलती नहीं हुई है। अगर आपके पास सेंटर लाइन गलत डालने का कोई प्रूफ हो तो हमें बता दीजिए। अगर गलत होगी तो उसमें तत्काल सुधार कर देंगे।

कहीं से भी सहारा नहीं मिला

उन्होंने बताया हम पिछले तीन सप्ताह से दुकान और घर बचाने के लिए महापौर मालिनी गौड़, फिर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, फिर उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी, पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन वर्मा, स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट, गृह मंत्री बाला बच्चन और नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धनसिंह से आग्रह किया था, लेकिन कहीं से भी हमें कोई सहारा नहीं मिला। सरकार में रहने के बाद भी इन पांच मंत्रियों ने हमें कोई रिस्पांस नहीं दिया। इसके अलावा प्रमुख सचिव संजय दुबे, कलेक्टर लोकेश जाटव और निगम कमिश्नर आशीषसिंह से भी मिलकर मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। व्यापारियों ने चक्काजाम, पैदल मार्च, दुकानें बंद, नारेबाजी जैसे आंदोलन किए मगर कोई फायदा नहीं हुआ।