नगरीय निकायों में वेतन के लाले, करना होगा इंतजार

नगरीय निकायों में वेतन के लाले, करना होगा इंतजार

भोपाल । राजधानी सहित प्रदेश की तमाम नगरीय निकायों में कर्मचारियों को मार्च महीने के वेतन के लाले पड़े हुए हैं। इसकी वजह है कि लॉकडाउन के चलते मार्च महीने में संपत्ति कर सहित अन्य टैक्स की वसूली कर निकाय अपना राजस्व टारगेट पूरा कर लिया करते थे, परन्तु दफ्तर  नहीं खुलने और वसूली बंद होने से भी निकायों की स्थिति खराब हो गई है। उधर सरकार ने नगरीय निकायों को मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति में 52 करोड़ रुपए काट लिए हैं। जिससे भी निकायों की माली हालात खराब हो गए है। नगरीय प्रशासन संचालनालय के सूत्रों का कहना है कि क्षतिपूर्ति की राशि में लगातार कटौती से नगरीय निकायों की वित्तीय हालत गड़बड़ा गई है। पहले हर महीने चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि के रूप में नगरीय निकायों को 324 करोड़ मिलते थे, लेकिन अगस्त 2019 में यह राशि 244 करोड़ कर दी गई है। इसके साथ राज्य सरकार ने इस बार जो राशि दी, उसमें से भी बिजली बिल के बकाया 52 करोड़ रुपए भी काट लिए हैं। सूत्रों का कहना है कि नगरीय निकायों के वित्तीय हालात पहले से ही खराब चल रहे हैं, और ऐसे में कोरोना से लड़ने के लिए संसाधन जुटाने पड़ रहे हैं। इसके साथ ही करों की वसूली के लिए तारीख 30 अप्रैल तक बढ़ाई गई है। इससे भी निकायों के पास पैसे का टोटा पड़ गया है।

भोपाल नगर निगम के पास भी पैसे की कमी, वेतन की दिक्कत

भोपाल नगर निगम में अगस्त 2019 से ही कर्मचारियों को वेतन बांटने में परेशानी हो रही है। पहले भोपाल को चुंगी क्षतिपूर्ति के 27 करोड़ रुपए मिलते थे। यह राशि अब घटकर 14 करोड़ रुपए कर दी गई है। यहां वेतन में ही 30 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होते हैं। इसके साथ डीजल, लोन की किस्त जोड़ लें तो नगर निगम को हर महीने 50 करोड़ रुपए की जरूरत कर्मचारियों के वेतन सहित विभिन्न मदों में पड़ती है। 

नहीं मिल रही पेंशन राशि

उधर, सामाजिक सुरक्षा, विधवा, वृद्धावस्था और नि:शक्तजन पेंशन और कन्यादान तथा सीएम निकाह योजना की राशि भी गरीबों को नहीं मिल पा रही है। इस संबंध में भोपाल गैस पीड़ित संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखते हुए विधवाओं की पेंशन बंद करने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन साथ ही निराश्रित पेंशन भोगियों को भी पेंशन राशि से मोहताज होना पड़ रहा है। उधर बैंकों के खुलने का समय कम होने के वजह से भी सामाजिक सुरक्षा, वृद्वावस्था पेंशन पाने में बुजुर्गों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

25 फीसदी गिरी सरकार की राजस्व आय

राज्य सरकार की मुख्य राजस्व आय आबकारी, कामर्शियल टैक्स, फॉरेस्ट, रेवेन्यू टैक्स, जल टैक्स तथा बिजली उपकर, परिवहन कर, स्टाम्प ड्यूटी आदि से होती है। वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 65 हजार करोड़ की आय का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लॉकडाउन की वजह से मार्च महीने में होने वाली आय में हुई गिरावट की वजह से सरकार को 25 फीसदी राजस्व कम मिला है।