लोगों को न्याय दिलाने में महाराष्ट्र नंबर वन, सबसे पीछे है उत्तरप्रदेश

लोगों को न्याय दिलाने में महाराष्ट्र नंबर वन, सबसे पीछे है उत्तरप्रदेश

नई दिल्ली। आम नागरिकों को न्याय मुहैया कराने में महाराष्ट्र राज्यों की सूची में शीर्ष पर है। वहीं, केरल दूसरे, तमिलनाडु तीसरे, पंजाब चौथे और हरियाणा 5वें स्थान पर है, वहीं यदि रिपोर्ट के आंकड़ों को देखा जाए कानून व्यवस्था के मामले में सबसे बुरा हाल उत्तर प्रदेश का हैं। टाटा ट्रस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, एक करोड़ से कम जनसंख्या वाले राज्यों में गोवा पहले, सिक्किम और हिमाचल प्रदेश क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर है, जबकि सबसे खराब हालत त्रिपुरा की है। टाटा ट्रस्ट, सेंटर फॉर सोशल जस्टिस, कॉमन कॉज, कॉमनवेल्थ ूमन राइट्स इनिशिएटिव, दक्ष, टीआईएसएस- प्रयास और विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी ने मिलकर देश की कानून व्यवस्था को लेकर एक रिपोर्ट बनाई है। इसे इंडिया जस्टिस रिपोर्ट के नाम से जारी किया गया है। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2019 विभिन्न सरकारी संस्थाओं जैसे पुलिस, न्यायपालिका, कारागार और कानूनी सहायता पर आधारित होता है। वहीं रिपोर्ट का कहना है कि 2016 और 2017 में सिर्फ 6 राज्य-केंद्रशासित प्रदेशों गुजरात, दमन-दीव, दादर-नगर हवेली, त्रिपुरा, ओडिशा, लक्षद्वीप, तमिलनाडु और मणिपुर ने ही कोर्ट में दर्ज सभी मामलों का निपटारा किया। 

टॉप-10 में शुमार है मध्यप्रदेश

इस रैंकिंग के लिए न्याय के चार प्रमुख स्तंभों का आंकड़ेवार अध्ययन किया गया है। इन चार स्तंभ में हैं - पुलिस, न्याय व्यवस्था, जेल और कानूनी सहायता। रिपोर्ट में 18 राज्यों में 10 सबसे अच्छे राज्य महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, ओडिशा, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ हैं। 7 छोटे राज्यों में (1 करोड़ से कम की आबादी) में गोवा नंबर एक है, दूसरे नंबर पर सिक्किम और हिमाचल प्रदेश हैं। 

इन मुद्दों का किया गया विश्लेषण

इस रिपोर्ट को तैयार करने में मानकों और मापदंडों की तुलना में बजट, मानव संसाधन, कर्मचारियों का कार्यभार, विविधता, बुनियादी सेवा सुविधाएं और प्रवृत्तियों की कसौटियों पर विश्लेषण किया गया है। इस विश्लेषण के आधार पर ही देश के राज्यों की सूची तैयार की गई है। 

पुलिस प्रशिक्षण को लेकर सवाल

रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में औसतन लगभग 6.4 फीसदी पुलिस फोर्स को ही सेवाओं के दौरान प्रशिक्षण दिया गया। इसका मतलब है कि 90 फीसदी से अधिक पुलिस वाले बिना आधुनिक प्रशिक्षण के ही कानून- व्यवस्था को संभाल रहे हैं। 

देशभर में 18,200 जज हैं और करीब 23%सीटें खाली

रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में 18,200 जज हैं और करीब 23% सीटें खाली हैं। वहीं विभिन्न संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व निम्न स्तर पर रहा। पूरे देशभर में न्याय और कानून व्यवस्था में महिलाओं की संख्या काफी कम है। जेल कर्मचारियों में 10 फीसदी महिलाएं हैं। हाई कोर्ट और लोअर कोर्ट के सभी जजों में महिला जज करीब 26.5 फीसदी ही हैं। जेलों में क्षमता से अधिक 114% कैदी भरे हुए हैं और इनमें से 68% कैदी अंडरट्रायल हैं। केंद्र द्वारा दी गई धनराशि का इस्तेमाल करने में राज्य पूरी तरह अक्षम पाए गए हैं। कई संस्थाएं कम बजट जैसी समस्याओं का सामना कर रही है। 

न्यायिक व्यवस्था में पाई गईं गंभीर खामियां

रिपोर्ट में हमारी न्यायिक व्यवस्था में गंभीर खामियां पाई गई है। न्यायिक व्यवस्था के समक्ष मुख्यधारा के मुद्दों पर न्याय देने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। यह मुद्दे हमारी सोसाइटी, सरकार और अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। - जस्टिस एमबी लोकुर, पूर्व जज सुप्रीम कोर्ट