देश भर में पिछले साल 4 लाख से ज्यादा सड़क हादसे, मप्र में इस दौरान 11हजार से ज्यादा मौतें

देश भर में पिछले साल 4 लाख से ज्यादा सड़क हादसे, मप्र में इस दौरान 11हजार से ज्यादा मौतें

भोपाल मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन और जुर्माना बढ़ाने का भले ही देश भर में जबरदस्त विरोध हुआ हो, लेकिन परिवहन विभाग के जो आंकड़े सामने आए हैं उनसे पता चलता है कि नियमों के न मानने के चलते दुर्घटनाओं में हर साल मृतकों की संख्या बढ़ रही है। सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के मुताबिक 2018 में भारत के 70 फीसदी रोड दुर्घटनाओं में 18 से 45 आयु वर्ग के लोग शामिल रहे हैं। 2018 में भारत में 4,67,044 सड़क दुर्घटनाएं हुर्इं, जो 2017 में हुई 464,910 सड़क दुर्घटनाओं से 0.5 प्रतिशत ज्यादा हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास दुनिया के कुल वाहनों के 1 प्रतिशत वाहन हैं, लेकिन यहां सड़क दुर्घटनाएं दुनियाभर में हुई दुर्घटनाओं का 6 प्रतिशत हैं। 2018 में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में रोड एक्सीडेंट में 73% मौतें भारत में हुई। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है 2038 तक भारत यदि दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें रोक ले तो इसकी जीडीपी 7 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

दुर्घटना में 64 फीसदी मौतें ओवर स्पीड से

* डब्ल्यूएचओ के ग्लोबल हेल्थ एस्टिमेट्स - 2017 के अनुसार, सड़क दुर्घटनाएं भारत में होने वाली मौतों के 12 सबसे आम कारणों में से एक है। यह समय से पहले होने वाली मौतों का नौवां सबसे सामान्य कारण है और विकलांगता का 10 वां सबसे सामान्य कारण है।

* 2018 में, सभी सड़क मौतों में सबसे ज्यादा दोपहिया (36 प्रतिशत) सवारी करने वाले थे। उसके बाद पैदल यात्री (15 प्रतिशत) थे।

* सड़क पर होने वाली मौतों के जो सबसे बड़े कारण हैं उनमें, ड्रंक एंड ड्राइव और लेन डिसिप्लिन की कमी (गलत साइड पर ड्राइविंग)। इसके अलावा रेड लाइट जंप करना, ड्राइविंग के समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना भी प्रमुख कारण हैं।

* ओवरस्पीडिंग भारत में सड़कों पर होने वाली मौतों का सबसे आम कारण है। सड़क दुर्घटना में 64 प्रतिशत मौतें तेज गति के कारण होती हैं।

* 60% दुर्घटनाएं हाईवे पर होती हैं।

अल्कोहल की छूट विदेशों में ज्यादा, दुर्घटनाएं कम

अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देशों में 50 एमएल से ज्यादा अल्कोहल पीकर गाड़ी चला सकते हैं, जबकि भारत में यह सीमा 30 एमएल है। इसके बावजूद विदेशों में ड्रंक एंड ड्राइव के कारण दुर्घटनाएं कम होती हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि नए जुर्माना नियमों और मीडिया की अधिक जागरूकता के बाद 2018- 19 में कुछ प्रदेशों में मौतों का आंकड़ा कम हो सकता है।