ब्लड प्लाज्मा से 3 दिन में ठीक हुए कोविड-19 के मरीज

ब्लड प्लाज्मा से 3 दिन में ठीक हुए कोविड-19 के मरीज

न्यूयॉर्क ।  कोरोना वायरस के उपचार के लिए एक नई थेरेपी चर्चा में आई है। इसमें कोरोना वायरस के इलाज के बाद स्वस्थ हुए मरीज के ब्लड का उपयोग किया जाता है। इस थेरेपी के जरिए चीन में कोविड-19 से गंभीर रूप से पीड़ित 10 मरीजों के इलाज में सफलता मिली है। गंभीर मरीजों की हालत 3 दिन के भीतर तेजी से सुधरी और इनमें से कुछ स्वस्थ भी हो गए। इन गंभीर मरीजों को इलाज के बाद स्वस्थ हुए मरीजों के ब्लड चढ़ाए गए। इस ब्लड में ऐसे एंटीबॉडी मौजूद होते हैं जो वायरस को खत्म कर सकते हैं। किसी नई दवा को विकसित करने की तुलना में यह विधि बहुत सस्ती भी है। नई दवा को विकसित करने में करोड़ों रुपए की लागत के अलावा परीक्षणों में लंबा समय भी लग सकता है।

 गंभीर मरीजों के इलाज के लिए मिली हरी झंडी

कान्वलेसन्ट प्लाज्मा थेरेपी के नाम से पहचानी जाने वाली चिकित्सा की इस पद्धति को अमेरिका और ब्रिटेन में गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए हरी झंडी दे दी गई है। इसके कोई साइड इफेक्ट भी सामने नहीं आए हैं। हालांकि यह अध्ययन अभी मरीजों के एक छोटे समूह पर ही किया गया है। न्यूयॉर्क सिटी की एक महिला ने इस हेतु अपना रक्तदान किया है ताकि इससे दूसरों का जीवन बचाया जा सके।

 कान्वलेसन्ट प्लाज्मा थेरेपी कितनी विश्वसनीय?

संक्रमण के उपचार के लिए इस थैरेपी का उपयोग लगभग सौ साल पहले 1918 में स्पेनिश  फ्लू के उपचार के लिए किया जा चुका है। वर्ष 2009-2010 में एच1एन1 इनफ्लुंएजा  वायरस की महामारी, वर्ष 2003 में सार्स तथा 2012 में मर्स के प्रकोप के दौरान भी इसका परीक्षण किया गया था।  विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ. माइक रियान के अनुसार अन्य संक्रमणों जैसे रैबीज एवं डिप्थिरिया में यह पद्धति जीवन रक्षक सिद्ध हो चुकी है।

अन्य बीमारियों में भी होता है इस पद्धति का उपयोग

इलाज की इस पद्धति में मरीज के शरीर में ब्लड प्लाज्मा इंजेक्ट किया जाता है। यह ब्लड प्लाज्मा पहले इसी बीमारी से स्वस्थ हो चुके मरीज के शरीर से निकाला जाता है। इस विधि का उपयोग सार्स और मर्स के इलाज में भी किया जा चुका है।