जेयू अब शोधार्थियों से आॅनलाइन मंगाएगा रिसर्च प्रोग्रेस रिपोर्ट

जेयू अब शोधार्थियों से आॅनलाइन मंगाएगा रिसर्च प्रोग्रेस रिपोर्ट

ग्वालियर। जीवाजी विवि पीएचडी करने वाले छात्र-छात्राओं से अब हर छह महीने में रिसर्च प्रोग्रेस रिपोर्ट आॅनलाइन मंगाएगा। अभी छात्र गाइड के पास रिपोर्ट जमा करता है। थीसिस पूरी होने के बाद चारों रिपोर्ट पीएचडी शाखा में जमा कराई जाती है। इसे लेकर पीएचडी मामले की जांच के लिए गठित जांच आयोग ने 23 आदिम जाति कल्याण विभाग के एडिशनल डायरेक्टर एसएस भंडारी, पूर्व कुलपति प्रो. मजाहिर किदवई के बेटे फर्जिल किदवई सहित 23 लोगों की पीएचडी को गलत माना है, क्योंकि शोधार्थियों ने हर छह महीने में रिसर्च प्रोग्रेस रिपोर्ट विवि में जमा नहीं की थी। सेवानिवृत्त जज डीके पालीवाल ने 23 लोगों की पीएचडी में अध्यादेश 7, 8 और 11 का पालन नहीं होने पर पीएचडी को गलत माना है।

इन लोगों ने रिपोर्ट विवि के बजाए गाइड के पास जमा कराई : पूर्व कुलपति के बेटे फर्जिल किदवई, अनिल कुमार उपाध्याय, फैयाज अहमद वानी, रामकुमार गौतम, प्रमेंद्र सिंह, राम कुमार शर्मा, प्रभाकर शर्मा, वैभव शर्मा, कृष्णकांत उपाध्याय, शशिवेंद्र सिंह, पारुल कुलश्रेष्ठ, कृतिका शुक्ला, श्वेता त्रिपाठी, रुचि कश्यप, सुप्रिया अग्रवाल, स्वाती श्रीवास्तव, रुचि बुंदेला, रफत फारुख, नवीन शर्मा, अभिषेक मिश्रा, निशार अहमद, छवि ऊथरा। छवि ऊथरा की गाइड प्रो. संगीता शुक्ला हैं। छवि ने लाइफ साइंस विषय में पीएचडी की है और रिसर्च प्रोगे्रस रिपोर्ट विवि में जमा कराने के लिए गाइड के पास जमा कराई थीं। जांच आयोग ने इस गलत माना है।