उद्योग निगमों मेंऔद्योगिक संगठन मांग रहे हैं प्रतिनिधित्व

उद्योग निगमों मेंऔद्योगिक संगठन मांग रहे हैं प्रतिनिधित्व

भोपाल ।  राज्य में औद्योगिक नीति में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। उद्योगपतियों को उम्मीद है कि प्रदेश में उद्योगों के अनुकूल प्रावधान जोड़े जाएंगे साथ ही, पूर्व में लिए गए, कई ऐसे निर्णयोंपर भी राज्य सरकार ध्यान देगी जो प्रदेश के उन्नत व्यवसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे है। प्रदेश के उद्योगपतियों का कहना है कि वे जल्दी ही सरकार से व्यवस्थागत और कार्यप्रणाली से संबंधित विषयों में बदलाव की मांग करने जा रहे हैं। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि निगमों के बोर्ड में भी उद्योग जगत का भी प्रतिनिधित्व सुनिश्चत करे सरकार, जिससे उनके हितों और व्यवहारिक कठिनाओं को ध्यान में रख कर योजनाओं का क्रियान्वयन हो सके। साथ ही, उद्योगपतियों की मांग है कि, पिछले कुछ सालों में राज्य सरकार ने संस्थागत व्यवस्था में परिवर्तन करते हुए विकास की योजनाओं को केन्द्रिकृत किया है और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आंवटित बजट से जुड़े मामलों में भी कई पहलुओं की अनदेखी की गई है। पीएचडी चेंबर आफ कामर्स के सलाहकार आरजी द्विवेदी के अनुसार, जो संस्थाएं नीति लागू करती है या फिर निर्णायक भूमिका निभाती है, ऐसे निगमों या बोर्ड में उस तबके का भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए जिनके लिए प्रस्तावों पर निर्णय लिया जा रहा है। मप्र औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) या ट्रेड एडं फेसिलिएशन सेन्टर, (ट्राइफेक) के बोर्ड में उद्योगपति सदस्य भी नियुक्त होना चाहिए। शुरु से ही औद्योगिक विकास निगम के मर्जर का विरोध कर रहे, प्रदेश के मुख्य शहरों के उद्योगपतियों का मानना है कि चूंकि योजनाएं स्थानीय स्तर पर बनती है, लेकिन स्वीकृति का प्रावधान भोपाल स्थित एमपीआईडीसी / ट्राइफेक के निर्णयों पर निर्भर करेगा, जिससे निर्णयों में अकारण देरी तो होगी और आय के संसाधनों का उचित बंटवारा नही होने से क्षेत्र विशेष के विकास पर खासकर निगम को अधिक आय देने वाले शहरों को नुकसान होगा। पीथमपुर औद्योगिक संगठन , अध्यक्ष, गौतम कोठारी के अनुसार, इंदौर एवं आस-पास के औद्योगिक क्षेत्र से एमपीआईडीसी को पूरे प्रदेश से प्राप्त आय का 80 फीसदी जाता है, लेकिन, किस क्षेत्र के लिए ट्राइफेक बोर्ड कितना बजट मंजूर करता है, इस पर कोई निश्चित पैमाना नहीं होने से, अधिक आय देने वाले शहर नुकसान में रहेंगे। वे आगे कहते हैं कि अधिक आय वाले क्षेत्रों के लिए अलग से बजट का प्रावधान हो।

मर्जर से आएगी पारदर्शिता

गौरतलब है कि पिछले साल राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी औद्योगिक केन्द्र विकास निगमों (एकेवीएन) का मर्जर करते हुए मप्र औधोगिक विकास निगम ( एमपीआईडीसी) बनाया है।,जो ट्राइफेक के साथ काम करेगा, जिसका मुख्यालय भोपाल में है। जो निर्णय स्थानीय स्तर पर एकेवीएन के मैनेजिग डॉयरेक्टर स्वतंत्र रुप से लेते थे, वे अब राजधानी से लिए जाएंगे। हालांकि, अधिकारी मर्जर को उचित ठहराते हुए बताते है कि इससे किसी भी तरह का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। बल्कि, कार्य में पारदर्शिता आएगी।