इंदौर केवल सफाई-खानपान में नहीं शिक्षा और समाजसेवा में भी ‘नंबर-1’

इंदौर केवल सफाई-खानपान में नहीं शिक्षा और समाजसेवा में भी ‘नंबर-1’

इंदौर। इंदौर न केवल स्वच्छता एवं खानपान में नंबर वन है, बल्कि शिक्षा और समाजसेवा में भी नंबर वन है। यहां की अच्छाइयां पूरी दुनिया में फैलाने की जरूरत है। आजकल फास्ट फूड का जमाना है। फास्ट फूड से नई-नई बीमारियां पैदा हो रही हैं। हमें पिज्जा बर्गर की बजाय पारम्परिक भारतीय भोजन इस्तेमाल करना चाहिओ, क्योंकि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। यह कहना है उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का। वे गुरुवार को श्री वैष्णव विद्यापीठ विवि के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मैं इस मंच से इस शैक्षणिक संस्थान के मेधावी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देता हूं कि वे देश और दुनिया के विकास में अपना योगदान दें। मैं कई शैक्षणिक संस्थाओं में दीक्षांत समारोह में गया हूं। मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों में महिलाओं का बहुमत रहता है। भारत सरकार भी महिलाओं को समाज के हर क्षेत्र में समुचित प्रतिनिधित्व देना चाहती है। शिक्षा का मूल उद्देश्य समाजसेवा और कौशल विकास होना चाहिए। कौशल विकास को हमें स्वच्छ भारत मिशन की तरह एक जनांदोलन बनाने की जरूरी है। शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं होना चाहिए।

भारतीय संस्कृति में सर्वे भवन्तु सुखिन: की शिक्षा

नायडू ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें समाजसेवा की प्रेरणा देती है। भारतीय संस्कृति में "सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु... " की परिकल्पना की गई है। भारतीय संस्कृति हमें एक साथ जीने, एक साथ खाने और एक साथ रहने की शिक्षा देती है। हजारों साल पहले आचार्य चाणक्य ने कहा था "अयम निज: परावेति, गणना लघुचेतसाम, उदारचरितानाम तु वसुधैव कुटुम्बकम।" उन्होंने उस युग में सम्पूर्ण धरती को परिवार माना था। आचार्य चाणक्य दुनिया के प्रथम अर्थशास्त्री थे, जिन्होंने कर प्रणाली की शुरुआत की।

सर्वोच्च स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को मिले गोल्ड मैडल

समारोह में उपराष्ट्रपति श्री नायडू द्वारा विद्यार्थी दिव्या पटेल, मुस्कान नीमा, मनांश कौशिक, प्रियंका विश्वकर्मा, नीलेशसिंह राजपूत, सत्यम मिश्रा और शेराली शर्मा को तकनीकी और पारम्परिक पाठ्यक्रमों में सर्वोच्च स्थान पाने पर गोल्ड मेडल प्रदान किया।