‘लेंथ’ में बदलाव कर चकमा दूंगा : शमी

‘लेंथ’ में बदलाव कर चकमा दूंगा : शमी

नई दिल्ली। भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने कहा कि भारतीय टीम शुक्रवार से कोलकाता में शुरू हो रहे दिन रात के टेस्ट में जब बांग्लादेश से खेलेगी तो बल्लेबाजों को चकमा देने के लिये वह गेंद की लेंथ में बदलाव करते रहेंगे। शानदार फार्म में चल रहे शमी ने इंदौर में पहले टेस्ट में सात विकेट लिये थे । उन्होंने स्टार स्पोटर्स पर नैरोलेक क्रिकेट लाइव पर कहा कि गेंदबाजों को विकेट पर नजरें बनाये रखनी होगी । पिच धीमी होने पर मुझे अतिरिक्त प्रयास करने होंगे और जब बल्लेबाज असहज नजर आए तो दबाव बनाना होगा। लेंथ में बदलाव करते रहने होंगे। इस बीच भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने इंदौर टेस्ट में दोहरा शतक जमाने वाले मयंक अग्रवाल को चेताया है कि बांग्लादेशी टीम आने वाले मैचों में उनके सामने बेहतर तैयारी के साथ उतरेगी। उन्होंने कहा कि वह टेस्ट क्रिकेट का मजा ले रहे हैं। यह उसका पहला साल है और उम्मीद है कि वह आगामी सत्र में भी लय कायम रखेंगे, लेकिन अब विरोधी टीम उसके खिलाफ अधिक तैयारी के साथ उतरेगी। भारत के पूर्व बल्लेबाज गौतम गंभीर ने कहा कि भारत के पास मुकम्मिल गेंदबाजी आक्रमण है । उन्होंने कहा कि कुछ टीमों के पास अच्छे तेज गेंदबाज और कुछ के पास अच्छे स्पिनर हैं लेकिन भारत के पास दो स्पिनर और तीन अच्छे तेज गेंदबाज हैं । बुमराह और भुवनेश्वर तो खेल भी नहीं रहे हैं यानी कुल मिलाकर आठ अच्छे गेंदबाज हैं और यही वजह है कि पिछले दो साल में भारत ने कई बार टीमों को आल आउट किया है।

हरभजन ने कहा, गुलाबी गेंद से कलाई के स्पिनरों को समझना अधिक मुश्किल

सीनियर आफ स्पिनर हरभजन ंिस्ांह का मानना है कि ईडन गार्डन्स में दूधिया रोशनी रोशनी में गुलाबी गेंद से अंगुली के स्पिनरों की तुलना में कलाई के स्पिनरों की गेंद को समझना अधिक मुश्किल होगा। भारत अपना पहला बहुप्रतीक्षित दिन- रात्रि टेस्ट बांग्लादेश के खिलाफ ईडन गार्डन्स में खेलेगा और इसे लेकर काफी उत्सुकता है कि गुलाबी गेंद कैसा बर्ताव करेगी।हरभजन ने कहा कि अगर आप देखोगे तो कलाई के स्पिनर फायदे की स्थिति में हैं क्योंकि गुलाबी गेंद में सीम को देखनार् काले धागे के कारणी काफी मुश्किल होता है। भारत के पास कुलदीप यादव के रूप में कलाई का स्पिनर है लेकिन हरभजन चयन मामलों पर बात नहीं करना चाहते। हरभजन ने कहा कि यह टीम प्रबंधन का फैसला होगा और मैं टिप्पणी नहीं कर सकता, लेकिन इससे पहले बांग्लादेश को तेज गेंदबाजी की अनुकूल पिच पर भारतीय गेंदबाजों का सामना करना होगा।

8 दिन में तैयार होती है एक एसजी गुलाबी गेंद

भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाले ऐतिहासिक डे-नाइट टेस्ट के लिए तैयारियां जोरों पर है लेकिन इसके बीच सभी की निगाहें उन एसजी गुलाबी गेंदों पर लगी हैं जिन्हें खास प्रक्रिया और आम गेंदों की तुलना में कई दिनों की मेहनत के बाद तैयार किया जाता है। भारत और बांग्लादेश की टीमें 22 नवंबर से ईडन गार्डन मैदान पर अपने क्रिकेट इतिहास के पहले डे-नाइट टेस्ट को खेलने उतरेंगे जिसे यादगार बनाने के लिए पूरे शहर को ही गुलाबी रंग में रंग दिया गया है। लेकिन डे-नाइट प्रारूप में इस्तेमाल की जाने वाली इन गुलाबी गेंदों के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प है जिसे तैयार करने में नियमित कूकाबूरा गेंदों की तुलना में करीब आठ दिन का समय लगता है। मेजबान भारतीय टीम सीरीज के दूसरे और अंतिम डे-नाइट टेस्ट को एसजी गुलाबी गेंदों से खेलेगी जबकि नियमित टेस्ट में सफेद रंग की कूकाबूरा गेंदों से खेला जाता है। एसजी गेंदें यानि की सैंसपेरिल्स ग्रीनलैंड्स क्रिकेट गेंदों को भारतीय खिलाड़ी खासा पसंद करते हैं और भारत में रणजी ट्रॉफी जैसा घरेलू टूर्नामेंट भी इन्हीं एसजी गेंदों से खेला जाता है। एसजी ब्रांड उत्तरप्रदेश के मेरठ में वर्ष 1950 से ही इन गेंदों का निर्माण कर रहा है। गुलाबी गेंदों की बात करें तो यह नियमित गेंदों की तुलना में काफी अलग है और इस एक गेंद को तैयार करने में कारीगरों को आठ दिन का समय लगता है। इन गेंदों को मुख्य रूप से मशीनों के बजाय हाथों से तैयार किया जाता है और इसमें उपयोग होने वाला चमड़ा भी विदेश से ही आयात किया जाता है।