खोखला ओडीएफ डबल प्लस का दावा खुले में बह रहा सीवर- हो रही शौच

खोखला ओडीएफ डबल प्लस का दावा खुले में बह रहा सीवर- हो रही शौच

ग्वालियर। ओडीएफ डबल प्लस सर्टिफिकेट के लिए ग्वालियर शामिल करवाने वाली शर्ते अधूरी रहने पर निगम के दावे खोखले नजर आ रहे है। हालात यह है कि शहर में खुले सीवर बहने की 100 दिन से ज्यादा समय वाली लगभग 12 से ज्यादा शिकाकते सीएम हेल्प लाइन में भरी पड़ी है, तो जल स्त्रोत वाली स्वर्ण रेखा-मुरार नदी में अभी भी खुले रूप से सीवर बहकर सीधे-सीधे मिल रहा है। साथ ही रेलवे पटरियां हो या गंदगी शहरी किनारे पर बस्तियों में खुले में शौच जाने का क्रम अभी भी जारी है। केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा स्वच्छथा सर्वेक्षण 2020 के पहले चरण में ओडीएफ डबल प्लस करने के फेरे में नगर निगम ग्वालियर के दावे पर सर्वेक्षण करने वाली एंजेसी क्यूसीआई 8 नंवबर को ग्वालियर में दस्तक देगी। निगम ने निरीक्षण के लिए शहर के 192 से ज्यादा शौचालयों में से 42 उत्कृष्ट शौचालयों को सर्वे करने वाली टीम को दिखाने की तैयारी कर ली है सुबह 4 बजे से रात्रि 10 बजे तक सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय खुलने वाले समय पर पर अधिकारियों का ज्यादा ध्यान है। ड्यूरी से गायब 12 कर्मचारियों का कटेगा वेतन निगम उपायुक्त स्वास्थ्य सत्यपाल सिंह चौहान को क्षेत्र क्रमांक 3 व 13 के औचक निरीक्षण में 12 सफाई संरक्षक अनुपस्थित मिले। जिनका तत्काल एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए।

रेलवे स्टेशन पर पटरियोंशहरी किनारे पर खुले में शौच

जानकारों की मानें तो रेलवे स्टेशन हो या निगम सीमा के शहरी क्षेत्र वाली बस्तियां के साथ पुराने मोहल्ले वाले कोटेश्वर, रामाजी का पुरा, खल्लासीपुरा, विक्की फैक्ट्री रोड, आनन्द नगर के पास बसी बस्तियों में लोगों अभी भी खुले में शौच जाते देखे जा रहे है और निगम के खुले में शौच जाने के दावों की पोल खोल रहे है।

नदियों में खुले में आकर मिल रहा सीवर

ओडीएफ डबल प्लस की शर्तों में खुले पेयजल स्त्रोंतो में सीवर का पानी न मिले यह प्रमुखता से है, लेकिन शर्ताे की धज्जियां उड़ाकर शहर के बीचों-बीच बहने वाली स्वर्ण रेखा व मुरार नदी में खुले रूप से आकर सीवर मिलता हुआ दिखा रहा है और सफाई व्यवस्था देखने वाले अधिकारी सबकुछ देख रहे है।

सीवर सफाई की 12 से ज्यादा शिकायतें लंबित

निगम के ओडीएफ डबल प्लस के दावों के बीच शर्तों की अनदेखी कर फर्जीवाड़े की बात इससे समझ में आती है कि 66 वार्डों में शहर के आम लोगों द्वारा 100 दिन पहले से सीएम हेल्प लाइन में लेवल-1, 2 व 3 पर लगभग 1217 शिकायतें लंबित है और लोगों 95 से ज्यादा निराकरण करने वाले निगम अधिकारी इनको हल नहीं कर पा रहे है।