मेंटेनेंस के नाम पर हैंडपंप, मोटर खोलकर ले गए पीएचई के इंजीनियर, 10 दिन बाद भी लौटे नही

मेंटेनेंस के नाम पर हैंडपंप, मोटर खोलकर ले गए पीएचई के इंजीनियर, 10 दिन बाद भी लौटे नही

भोपाल  । रायसेन, होशंगाबाद, चंबल-ग्वालियर सहित प्रदेश के करीब डेढ़ दर्जन जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गंभीर बना हुआ है। ग्रामीणों को काफी दूर से पानी लाना पड़ रहा है। इधर, पीएचई के इंजीनियर हैंडपंप सुधारने के नाम पर मनमर्जी कर रहे हैं। एक हμते पहले इंजीनियर मेंटेनेंस के नाम पर कई गांवों से हैंडपंप के पाट्Þर्स और नल जल योजना के खराब पड़े मोटर खोलकर ले गए , लेकिन दोबारा लौटे ही नहीं। पीपुल्स समाचार ने 13 मई को जलसंकट पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। खबर छपने के दूसरे दिन रायसेन जिले के गाजीखेड़ी, होशंगाबाद के तालकेसरी, जबलपुर जिले के सीहोरा से लगे गांवों में पीएचई के इंजीनियर पहुंचे थे। उन्होंने ग्रामीणोें को आश्वासन दिया था कि दो-तीन दिन में हैंडपंप तथा नल जल योजनाओं को ठीक करा दिया जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार, 10 दिन हो गए लेकिन अब तक हैंडपंप और नल-जल योजना के मोटर सुधारे नहीं गए हैं।

 ग्रामीण बोले- दो दिन में सुधारने का दिया था आश्वासन

ग्राम गाजीखेड़ी, जिला रायसेन आबादी 900, कुल हैंडपंप 5, बंद 3 गांव के मोहन सिंह चौहान ने बताया कि पीपुल्स समाचार में खबर छपने के दूसरे ही दिन गांव में पीएचई के सहायक इंजीनियर सहित अन्य इंजीनयर आए थे। वे मेंटेनेंस के लिए हैंडपंप खोलकर ले गए थे। बोला था कि दो-तीन दिन में हैंडपंप सुधार देंगे, लेकिन आज तक सुधारा नहीं। नल जल योजना भी चालू नहीं हुई। हम आज भी वैसे ही परेशान हो रहे हैं। ग्राम तालकेसरी, होशंगाबाद आबादी 2200 , हैंडपंप 8, बंद 2 गांव के हाकिम सिंह ने बताया कि गांव में पेयजल संकट को लेकर खबर छपने के गाद पीएचई के इंजीनियर आए थे। गांव में बंद पड़े 8 हैंडपंपों में से उन्होंने 6 को सुधार कर चालू करा दिया था। बाकी दो हैंडपंप के बारे में कहा था कि इसे भी जल्द सुधार दिया जाएगा, लेकिन नहीं सुधारा। ग्रामीण हैंडपंप सुधरने का इंतजार कर रहे हैं।

मेंटेनेंस हुआ नहीं और बिल बनाने का ‘खेल’ शुरू 

इधर, हैंडपंप और मोटर भले ही नहीं सुधरे हों, लेकिन मेंटेनेंस के नाम पर लंबे-चौडे बिल बनाने का काम पीएचई विभाग में शुरू हो गया है। उधर, नल जल योजनाओं की मोटर जली होने, पाइप लाइन खराब होने और विद्युत मोटर ठीक कराने में खेल किए जाने की शिकायतें मिली हैं। हालांकि सरकार दावा कर रही है कि उसने कुछ दिन के भीतर ही 9 हजार हैंडपंपों को ठीक कराया है, लेकिन गांवों की तस्वीर कुछ और बयां कर रही है।

 यहां मिली थोड़ी सी राहत

बरगी विस क्षेत्र में स्थित शहपुरा के पहाड़ी इलाके में बसे देवरी नवीन गांव में कई वर्षों से पानी की विकराल समस्या थी। इसको देखते हुए यहां पर सिंगल फेस पंप से पानी सप्लाई की व्यवस्था कराई गई। रामकुमार सैयाम, सरपंच, देवरी नवीन

 सिंगल फेस पंप से सप्लाई

 हमारे गांव में हर साल गर्मियों में पेयजल का संकट होता था। बहुत दूर से पानी लेकर आना पड़ता था। पीपुल्स समाचार में खबर छपने के बाद सिंगल फेस पंप के द्वारा जलप्रदाय किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को थोड़ी राहत मिली है। राजेश परस्ते, चिरापोंडी गांव

 लापरवाही बर्दास्त नहीं

सरकार ने पेयजल संकट को दूर करने के लिए व्यवस्था की है। फिर भी यदि किसी गांव में पानी की परेशानी है और वहां इंजीनियरों की लापरवाही सामने आई, तो उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। मलय श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव, पीएचई विभाग