गैंग आॅफ ठग :मुंबई में है लीड बैंक इन्फोटेक का ‘बॉस’

गैंग आॅफ ठग :मुंबई में है लीड बैंक इन्फोटेक का ‘बॉस’

इंदौर। सी-21 मॉल के पीछे कई महीनों से संचालित हो रहे ठगी के कारोबारियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस नेटवर्क को खंगालने में लगी है। चार बिल्डगों में आॅफिस व फ्लैट किसने दिलाया, उसकी भी तलाश ली गई। कंपनी लीड बैंक इन्फोटेक के नाम से संचालित हो रही थी। इसका मालिक मुंबई निवासी विपिन अग्रवाल था। विपिन ने कंपनी को रजिस्टर भी नहीं कराया था। पुलिस का एक दल गुरुवार 13 जून को विपिन की तलाश में मुंबई जाएगा। बैंक में जमा ठगी की राशि का आहरण रोकने साइबर क्राइम ने बैंक को चिट्टी लिखी है। साइबर एसपी जितेन्द्रसिंह ने बताया कि ठगोरे इतने शातिर हैं कि वारदात करने के बाद पैसा कहां रखते थे, खुद कर्मचारियों को पता नहीं चलता था। रिमांड पर चल रहे तीनों आरोपी जावेद, राहिन और भाविल के अलावा किसी को कानोकान कारोबार के मास्टर माइंड की भनक तक नहीं लग पाती थी। आॅफिस में आने वालों को भी इतना रिस्पेक्ट दिया जाता था कि शक की कोई गुंजाइश न रहे। ग्राहकों से लोकलुभावनी बातों के लिए यहां नागालैंड व मेघालय की 18 से 25 साल की 19 लड़कियां रखी गई थी। उन्हें रहने के लिए यहीं बिल्डिंग में फ्लैट दे रखा था, ताकि वे बाहर नहीं जा सके। आरोपियों को शक था कि लड़कियां बाहर रहने चली गई तो कारोबार का खुलासा हो सकता है। स्थानीय व्यक्ति पर शक-स्थानीय स्तर पर भी कुछ लोगों के इनके साथ मिलने होने की बात पुलिस ने कही है। पुलिस को मुलजिमों ने कुछ लोगों के नाम बताए हैं, जिनसे पूछताछ की जा रही है। इनके खातों को भी सील किया जा रहा है। पैसा कहां जाता था, इसका भी पता लगाने के लिए बैंक को चिट्ठी लिखी गई है। पांच अंकों में मिलता था वेतन लड़कियों के बारे में पता चला कि उन्हें मोटी रकम पांच अंकों में दी जाती थी। मेघालय और नागालैंड में रोजगार की कमी होने के कारण उन्हेंं इंदौर ले आए थे। हालांकि अभी उन्होंने यह नहीं बताया है कि वो ठगी कर रही है। कई लड़कियों ने पुलिस के सामने ये बात कही कि हमें पता नहीं था कि पूरा मामला फर्जी है, परन्तु उनकी बातों पर यकीन नहीं हुआ, क्योंकि यहां कई दिनों से गड़बड़ की जा रही थी। फिलहाल, पुलिस हर बिंदु पर गहन जांच- पड़ताल कर रही है।

आॅफिस से नहीं मिला कैश

हवाला का पैसा ये लोग कैसे प्राप्त करते थे। राहिल सभी कर्मचारियों को दस तारीख को सैलरी देता था। छापामार कार्रवाई के दौरान पुलिस को आॅफिस से रुपया नहीं मिल सका है। यह पैसा कहां रखा है, इसका पता लगाया जा रहा है। वहीं आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कराई जा रही है। बाकी के आरोपियों के मिलने पर कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

ठिकाने ढूंढने अहमदाबाद गई टीम

धोखाधड़ी का कारोबार करने वालों के साथियों के ठीये तलाशने पुलिस कई शहरों में रवाना हुई। गिरफ्त में आए आरोपियों को अमेरिका के लोगों के फ्लैट तक लेकर जाएंगे, ताकि आमनेसा मने बैठाकर केस मजबूत किया जा सके। शहर में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर अमेरिका के लोगों को ड्रग्स और मनी लांड्रिंग में फंसाने के नाम पर ठगी करने वालों को पुलिस ने दो दिन पहले पकड़ा था। पुलिस के हाथ आए तीन प्रमुख आरोपी जावेद, शाहरूख और भाविल ने पूछताछ में कई राज उगले हैं।