नदी पुनर्जीवन के DPR में खामियां, कमिश्नर ने लौटाए कई जिलों के प्लान

नदी पुनर्जीवन के DPR में खामियां, कमिश्नर ने लौटाए कई जिलों के प्लान

भोपाल । प्रदेश की 40 नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बनाए गए प्लान पर दर्जनभर जिलों के कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत पानी फेर रहे हैं। विभाग पिछले छह माह से जिलों से नदियों का डीपीआर मांग रहा है, लेकिन अब तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। मप्र रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त ने उन डीपीआर को जिलों में वापस कर दिया है, जिनमें खामियां हैं। प्रदेश की 35 जिलों की सूख चुकी नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए पिछले छह माह से जिलेवार डीपीआर तैयार कराई जा रही हैं। तत्कालीन आयुक्त मनरेगा जीवी रश्मि ने 10 मई को (15 जिलों के कलेक्टरों को छोड़कर) जिलों को पत्र लिखा था कि चयनित कार्यों का संकलन कर डीपीआर तैयार करें। आयुक्त ने कलेक्टरों से यह भी कहा था कि नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम की डीपीआर तैयार करने और प्रथम चरण के तहत स्वीकृत कार्यों का क्रियान्वयन अपेक्षित गति से नहीं किया जा रहा है। यह है प्लान : नदी पुनर्जीवन से 1,863 पंचायतों में आने वाले 3,621 गांवों के सवा लाख किसानों को फायदा होगा। 2,129 किमी लंबी नदियों के दो लाख हेक्टेयर से ज्यादा कैचमेंट क्षेत्र का विकास करके 40 नदियों को पुनर्जीवित किया जाएगा।

इन जिलों को छोड़कर मांगी डीपीआर

अशोकनगर, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, होशंगाबाद, इंदौर, मंदसौर, पन्ना, रायसेन, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन, हरदा, विदिशा।

ये हैं डीपीआर के हिस्से

स्टेगर्ड कंटूर ट्रेंच, बोल्डरवाल, कंटूर बंडिंग, सोकपिट, लूज बोल्डर चेक, मेढ़बंधान सह खंती, गेबियन संरचना, परकोलेकशन पिट, तालाब, चेकडैम, नाला बंधान तथा इसकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ोत्तरी, वनीकरण हेतु वृक्षारोपण, फलदार पौधों का रोपण, खेत तालाब, जलसंग्रहण तालाब, रिचार्ज वेल, गेटयुक्त स्टापडैम, गेटविहीन चेकडैम।