कोविड-19 के PR में हर दिन बदला टारगेट ग्रुप

कोविड-19 के PR में हर दिन बदला टारगेट ग्रुप

I AM BHOPAL । जनसंपर्क के इतिहास में मुझे नहीं लगता कि इससे पहले एक समय में कभी जनसपंर्क इतनी सारी विविधताओं और चुनौतियों से भरा रहा होगा। यह पहला मौका था, जब एक साथ हम अलगअलग टारगेट ग्रुप को एड्रेस कर रहे थे। यह कहना था, मध्यप्रदेश माध्यम के विशेष कार्याधिकारी प्रोफेसर पुष्पेंद्र पाल सिंह का। वे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विवि (अमरकंटक) द्वारा कोरोना एवं जनसंपर्क विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार ने बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हमनें शुरुआत जनता को कोरोने से अवगत कराने से की। फिर हेल्थ कम्युनिकेशन, साइंस आधारित बात की गई। इसके साथ ही क्राइसिस मैनेजमेंट संबंधित बातें पीआर ने की। लोगों की खानपान और सेहत की आदतों में बदलाव लाने के लिए लाइफस्टाइल कम्युनिकेशन किया। फिर बिहेवियर और डोमेस्टिक वायलेंस और बच्चों को लेकर बात हुई। फिर व्यापारी, किसान और मजदूरों और बेरोजगारी के मुद्दे को एड्रेस किया।

 प़ॉजिटिव कम्युनिकेशन के लिए सच्चाई जरूरी

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय( अमरकंटक) के कुलपति प्रोफेसर प्रकाश मणि त्रिपाठी ने जनसंपर्क में सत्य और समर्पण को पॉजिटिव कम्युनिकेशन के लिए आवश्यक बताया। काशी हिंदू विवि के जनसंपर्क अधिकारी रहे डॉ विश्वनाथ पाण्डेय ने जनसंपर्क के बुनियादी बिंदुओं पर बात करते हुए कहा कि जनसंपर्क पर दूसरे विभागों की असफलता का बोझ नहीं डाला जा सकता। उन्होने शोध को आधुनिक जनसंपर्क के लिए आवश्यक बताया। उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी डॉ अमित मालवीय ने रेलवे द्वारा किए जा रहे प्रयासों को साझा किया इसे सबके सामने रखा। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के डीन प्रोफेसर आतिश पाराशर ने अपनी बात रखी।