पं. नेहरू व इंदिरा गांधी तक ने खाई जबलपुर की जलेबी

पं. नेहरू व इंदिरा गांधी तक ने खाई जबलपुर की जलेबी

जबलपुर ।  125 साल पहले शुरु हुई खोवे की जलेबी अब सात समंदर पार पहुंच चुकी है। इसकी शुरुआत हर प्रसाद बड़कुल 1889 में की थी, जोकि महाकोशल में लोकप्रिय होने के बाद फिल्मी सितारों से लेकर प्रथम प्रधानमंत्री नेहरु और फिर इंदिरा गांधी तक की पसंद बनी। इस समय बड़कुल की चौथी पीड़ी परंपरागत व्यवसाय को आगे बढ़ृा रही है। जबलपुर ही नहीं पूरे महाकोशल क्षेत्र में बड़कुल की जलेबी लेने आने वालों की दुकान पर सुबह से भीड़ लग जाती है।

1962 में नेहरू ने खाई

1962 में जवाहर लाल नेहरू और 1967 में स्व. इंदिरा गांधी जब जबलपुर आई तो वे बड़ेरिया के यहां खोवे की जलेबी खाने पहुंची थीं। इतना ही नहीं इंदिरा गांधी दिल्ली में किसी भी आयोजन में बड़कुल की जलेबी जरूर बुलवातीं थीं। वहीं 1950 में तिलवारा में कांग्रेस अधिवेशन हुआ तो बडेरिया की जलेबी का सबने स्वाद लिया था।

105 साल पुरानी है दुकान

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. श्याम सुंदर बड़रिया की खोवा की जलेबी दूर-दूर तक मशहूर है। वर्तमान में स्व. बड़ेरिया की बहू गीता बड़ेरिया व उनके बेटे 82 वर्षीय वीपी बड़ेरिया इस कारोबार को संभाल रहे हैं।

प्रेमनाथ और दारा सिंह की पसंद

फिल्मी कलाकार प्रेमनाथ मुम्बई से जब भी जबलपुर आते थे तो बड़कुल की जलेबी खाए बिना नहीं जाते थे। इतना ही नहीं 1967 के दौर में कई कलाकारों को बड़कुल की जलेबी का स्वाद चखाया था। वे हर बार 5 किलो जलेबी लेकर मुंबई जाते थे। दारा सिंह भी जलेबी के शौकीन रहे हैं और कई बार मुंबई मंगाइं। अब हरप्रसाद बड़कुल की चौथी पीढ़ी मनीष व मोहित इसको संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी जलेबी अमेरिका, जर्मन और दुबई तक गई हैं।