70 साल पुराने अयोध्या केस पर आज ‘सुप्रीम’ फैसले का दिन

70 साल पुराने अयोध्या केस पर आज ‘सुप्रीम’ फैसले का दिन

नई दिल्ली। 70 साल से चल रहे राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाएगा। फैसले से पहले सीजेआई रंजन गोगोई ने यूपी के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी और डीजीपी ओपी प्रकाश सिंह से राज्य में सुरक्षा बंदोबस्तों और कानून व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। फैसले के मद्देनजर यूपी के सभी स्कूलों में 9 नवंबर से लेकर 11 नवंबर तक छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं। सोशल मीडिया ग्रुप्स की निगरानी के लिए वॉलेंटियर लगाए गए हैं। अयोध्या में केंद्रीय सुरक्षाबलों के 4,000 जवान तैनात हैं। सीजेआई रंजन गोगोई को जेड प्लस सुरक्षा देने के साथ ही बेंच के पांचों जजों की सुरक्षा बढ़ाई गई है। 

केंद्रीय मंत्रियों को फैसले पर बयान देने से रोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फैसले के बाबत सभी मंत्रियों को फैसले पर अनावश्यक बयान देने से बचने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा- अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वह किसी की हार-जीत नहीं होगा। देशवासियों से मेरी अपील है कि हम सब की यह प्राथमिकता रहे कि ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना की महान परंपरा को और बल दे। 

70 साल पहले दर्ज हुआ था पहला मुकदमा

1950 : अयोध्या मामले को लेकर पहला मुकदमा ‘राम लला‘ के भक्त गोपाल सिंह विशारद ने 1950 में दायर किया था। उन्होंने विवादित स्थल पर हिंदुओं के पूजा अर्चना का अधिकार लागू करने की मांग की थी। उसी साल, परमहंस रामचंद्र दास ने भी पूजा जारी रखने और विवादित ढांचे के मध्य गुंबद के नीचे ही मूर्तियां रखी रहने के लिए मुकदमा दायर किया थे। यह बाद में वापस ले लिया।

1959 : निर्मोही अखाड़े ने 2.77 एकड़ विवादित स्थल के प्रबंधन और शेबैती अधिकार के लिए निचली अदालत में वाद दायर किया।

1961 : यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड भी अदालत में पहुंचा गया और उसने विवादित संपत्ति पर अपना मालिकाना हक होने का दावा किया।

1989 : ‘राम लला विराजमान’ की ओर से इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस देवकी नंदन अग्रवाल और जन्म भूमि ने मुकदमा दायर किया।

2010 : सितंबर में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित भूमि 3 पक्षकारों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान में बराबर- बराबर बांटने का आदेश दिया था। 

40 दिनों तक चली सुनवाई :

6 अगस्त 2019 को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर रोजाना सुनवाई शुरू की। 40 दिन तक रोजाना सुनवाई हुई। 

सीएम ने की अमन की अपील मप्र के स्कूलों में आज छुट्टी, जिलों में धारा 144

अयोध्या फैसले के दिन को लेकर पूरे प्रदेश में धारा 144 लागू की गई है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश के लोगों से अमन की अपील की है। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने राज्य के सभी स्कूल बंद रखने के निर्देश दिए हैं। शहरों के चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है। हैं। भोपाल कलेक्टर तरुण पिथौड़े ने जिले के लोगों से शांति और अमन कायम रखने की अपील की है। शहरों में धारा-144 प्रभावी है। शनिवार को सभी शराब दुकानें बंद रहेंगी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट और यात्री वाहन सेवाएं यथावत चलेगीं। सरकारी, प्राइवेट संस्थान भी खुलेंगे। व्यापाकिर प्रतिष्ठान भी खुलेंगे। 

मंदिर बने या मस्जिद हम ईद की सिवई और दिवाली की मिठाई साथ खाएंगे

आज अयोध्या पर सुप्रीम फैसले का दिन है। लेकिन, ध्यान रहे, यह किसी की हार-जीत का फैसला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले धर्म और जाति देखकर नहीं, बल्कि सबूतों के आधार पर होते हैं। पुरातत्वविदों से लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत ने वर्षों तक इस विवाद को खत्म करने पर काम किया है। फैसला आना है, आने दीजिये! जो भी फैसला होगा हम उसका सम्मान करेंगे। हम ईद की सिवइयां और दिवाली की मिठाई एक साथ ही खाएंगे। आखिर 70 बरस पुराना एक विवाद खत्म होने जा रहा है।