चंद्रयान-2; दो महिला सांइटिस्ट के हाथ में था नेतृत्व

चंद्रयान-2; दो महिला सांइटिस्ट के हाथ में था नेतृत्व

नई दिल्ली। चंद्रयान-2 को नेतृत्व दो महिला वैज्ञानिकों के हाथ में था। इसरो के किसी अंतरिक्ष मिशन में ऐसा पहली बार हुआ। इनमें वनिथा मुथैया प्रोजेक्ट डायरेक्टर के तौर काम कर रही हैं तो रितु करिढाल मिशन डायरेक्टर हैं। दोनों को 20 वर्ष से अधिक का अनुभव है। इसरो के अनुसार, चंद्रयान-2 को संभव करने वाले स्टाफ में 30 फीसदी महिलाएं हैं। वनिथा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम इंजीनियर ओर डाटा विश्लेषण विशेषज्ञ हैं। उनका काम चंद्रयान का अहम उद्देश्य पानी, विभिन्न धातुओं और खनिजों सहित चंद्र सतह के तापमान, विकिरण, भूकंप आदि का डाटा जमा करना है। वनिथा चंद्रयान-1 के लिए भी यह काम कर चुकी हैं। वे भारत के रिमोट सेन्सिंग उपग्रहों की व्यवस्था भी संभालती रही हैं।

मुथैया यूआर राव

मुथैया डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग में माहिर हैं। उन्होंने उपग्रह संचार पर कई पेपर लिखे हैं। उन्होंने मैपिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले पहले भारतीय रिमोट सेंसिंग उपग्रह (काटोर्सैट 1), दूसरे महासागर अनुप्रयोग उपग्रह (ओशनसैट 2) और तीसरे उष्णकटिबंधीय में जलचक्र व ऊर्जा विनिमय का अध्ययन करने के लिए इंडो-फ्रेंच उपग्रह (मेघा-ट्रॉपिक) पर उप परियोजना निदेशक के तौर पर काम किया है। 2006 में उन्हें एस्ट्रॉनॉटिकल सोसाइटी आफ इंडिया ने सर्वश्रेष्ठ महिला वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया था। साइंस जर्नल नेचर ने उनका नाम उन 5 वैज्ञानिकों की श्रेणी में रखा था जिन पर 2019 में नजर रहेगी।

रितु करिधाल श्रीवास्तव

रितु करिढाल चंद्रयान-2 के चंद्रमा की परिक्रमा, कक्षा में दाखिल होने से जुड़े मिशन पर फोकस रहेंगी। इस काम को बेहद जटिल माना जा रहा है। वे आईआईएससी बेंगलुरु से अंतरिक्ष विज्ञान इंजीनियरिंग में मास्टर्स कर चुकी हैं। रितु इससे पहले मार्स आर्बिटर मिशन (एमओएम) की डिप्टी आपरेटिव निदेशक के तौर भी पर इसरो के लिए काम कर चुकी हैं। एमओएम भारत का पहला अंतर-ग्रहीय मिशन है जिसे वर्ष 2013 में प्रक्षेपित किया गया था। उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ साइंस से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। 2007 में उन्हें इसरो का युवा वैज्ञानिक पुरस्कार मिल चुका है।