चंद्रयान-2- रात 1:52 बजे चांद से 2.1 किमी ऊपर लैंडर से संपर्क टूटा, उम्मीदें नहीं

चंद्रयान-2- रात 1:52 बजे चांद से 2.1 किमी ऊपर लैंडर से संपर्क टूटा, उम्मीदें नहीं
चंद्रयान-2- रात 1:52 बजे चांद से 2.1 किमी ऊपर लैंडर से संपर्क टूटा, उम्मीदें नहीं
चंद्रयान-2- रात 1:52 बजे चांद से 2.1 किमी ऊपर लैंडर से संपर्क टूटा, उम्मीदें नहीं
चंद्रयान-2- रात 1:52 बजे चांद से 2.1 किमी ऊपर लैंडर से संपर्क टूटा, उम्मीदें नहीं
चंद्रयान-2- रात 1:52 बजे चांद से 2.1 किमी ऊपर लैंडर से संपर्क टूटा, उम्मीदें नहीं
चंद्रयान-2- रात 1:52 बजे चांद से 2.1 किमी ऊपर लैंडर से संपर्क टूटा, उम्मीदें नहीं

बेंगलुरू। रात 1:52 बजे! इसरो के मिशन कंट्रोल के साथ हर देशवासी उस तनाव को महसूस कर सकता था, जो विक्रम लैंडर के लैंड होने के पहले वैज्ञानिकों के मन में चल रहा था। रात 1:38 बजे विक्रम ने चंद्रमा की तरफ उतरना शुरू किया। सब-कुछ इसरो के वैज्ञानिकों के द्वारा तय प्रोग्रामिंग के अनुसार चल रहा था। हमने अचानक स्क्रीन पर लैंडर की ट्रैजेक्ट्री पर बन रही हरी लाइन तय रास्ते से हट गई और नीचे की ओर जाती हुई दिखने लगी। कुछ देर तक सब-कुछ शांत था। हमने मिशन कंट्रोल के वैज्ञानिकों को अक्सर ताली बजाते हुए देखा है, लेकिन इस समय उनके चेहरे पर तनाव था। इसरो डायरेक्टर ने पीएम मोदी को कुछ ब्रीफ किया, इस ब्रीफिंग के दौरान उनके चेहरे पर तनाव साफ देखा जा सकता था। हालांकि पीएम मोदी ने उन्हें हिम्मत बंधाई। कुछ देर बाद इसरो चेयरमैन सिवन ने मिशन कंट्रोल से घोषणा की कि चंद्रमा की सतह से 2.1 किमी. ऊपर लैंडर से संपर्क टूट गया था। रात 3:11 बजे इसरो के मीडिया सेंटर से प्रवक्ता ने चंद्रयान -2 से संपर्क टूटने की आधिकारिक घोषणा की।

चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को लाल रंग के पाथ पर चलना था, जिससे वह तय स्थान पर लैंड करता। हरे रंग की लाइन विक्रम की वास्तविक स्थिति बता रही है, यानी लैंडिंग से 2.1 किमी पहले वह पाथ से भटक गया। 2:06 मिनट पर एक बार इससे संपर्क होने की बात कही गई, लेकिन यह फिर टूट गया।

चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग के अब तक 38 प्रयास हुए, 52% ही सफल

चांद को छूने की पहली कोशिश 1958 में अमेरिका और सोवियत संघ ने की थी। अगस्त से दिसंबर 1968 के बीच दोनों देशों ने 4 पायनियर आर्बिटर (अमेरिका) और 3 लूना इंपैक्ट (सोवियत यूनियन) भेजे लेकिन सभी असफल रहे। अब तक चांद पर दुनिया के सिर्फ 6 देशों या एजेंसियों ने सैटेलाइट यान भेजे हैं। कामयाबी सिर्फ 5 को मिली। अभी तक ऐसे 38 प्रयास किए गए, जिनमें से 52% सफल रहे।