मुंबई में कोरोना मरीजों के लिए कार्डबोर्ड का बेड, सूटकेस की तरह होगा फोल्ड

मुंबई में कोरोना मरीजों के लिए कार्डबोर्ड का बेड, सूटकेस की तरह होगा फोल्ड
मुंबई में कोरोना मरीजों के लिए कार्डबोर्ड का बेड, सूटकेस की तरह होगा फोल्ड

 मुंबई । देश में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं, इनमें भी महाराष्ट्र टॉप पर है। बिगड़ते हालात को काबू में करने के लिए बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कार्पोरेशन (बीएमसी) ने 7,000 कार्डबोर्ड से बने पलंग (बेड) तैयार कर लिए हैं। इनमें से 5000 बेड को शहर के विभिन्न आइसोलेशन और क्वारंटाइन सेंटरों में भेजा जा चुका है। उल्लेखनीय है कि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कई अस्पतालों में बेड कम पड़ने लगे थे, जिसके बाद कार्डबोर्ड से बने बेड तैयार कराए गए हैं। कार्डबोर्ड से बने इन बेड को मुंबई के जायना पैकेजिंग नाम की कंपनी ने तैयार किया है। कंपनी के मालिक हरेश मेहता ने बताया कि कार्डबोर्ड से बने होने के बावजूद ये बेड बहुत सॉलिड हैं। ये 300 किलोग्राम तक का वजन आसानी से सहन कर सकते हैं। इस बेड पर एक साथ दो से तीन लोग आसानी से खड़े हो सकते हैं।

पानी से बचाना जरूरी है

यह बेड कार्डबोर्ड से बना है, इसलिए इसे पानी से बचाना होगा। पानी की बूंदें या कम पानी यह आसानी से झेल सकता है। हरेश ने बताया कि हमने डॉक्टरों-नर्सों के लिए कार्डबोर्ड की टेबल-कुर्सी भी तैयार की हैं।

 बेड की खासियते

6’x3’x1.5’ साइज के इस बेड को एक सूटकेस की तरह फोल्ड करके कहीं भी ले जाया जा सकता है। इसे सिर्फ 3 मिनट में इंस्टॉल किया जा सकता है। कम्प्रेस कार्डबोर्ड से बने होने के कारण इसपर 300 किलोग्राम का वजन रखा जा सकता है।  वजन में बेहद हलके इस बेड को एक व्यक्ति आसानी से किसी भी कोने में शिफ्ट कर सकता है। सूखे कपड़े से इसे आसानी से साफ किया जा सकता है। इस पर कीटाणु सिर्फ 24 घंटे तक रह सकते हैं। कोविड पेशेंट के इस्तेमाल के बाद इसे सैनिटाइज और रीसाइकिल किया जा सकता है। इसमें कोई भी मेटल पिन और स्टेपल्स इस्तेमाल नहीं किए गए हैं। एक बेड की कीमत करीब 1 हजार रुपए के अंदर रखी गई है। इस बेड को सिर्फ दो दिन की रिसर्च में तैयार किया गया है।

पहले देश की जरूरत को पूरा करेंगे, फिर विदेश भेजेंग

मेहता ने बताया- हम कार्डबोर्ड के मटेरियल के निर्माण में 30 साल से जुड़े हैं। हम अपने घर में इससे बने बेड इस्तेमाल कर रहे थे। मार्च में कोरोना के खतरे को भांपकर हमने इस पर रिसर्च की। मेहता को दुनिया के कई देशों से इसके आॅर्डर मिले हैं, लेकिन उनका कहना है कि वे पहले देश की जरुरत पूरा करेंगे और फिर दुनिया के किसी अन्य देश में इसकी सप्लाई करेंगे। बीएमसी के साथ एक बड़ा आॅर्डर अभी पाइपलाइन में हैं।