पबजी के चक्कर में 16 साल के बच्चे का बीपी 171 पहुंचा

पबजी के चक्कर में 16 साल के बच्चे का बीपी 171 पहुंचा

भोपाल। शौक, शौक ही रहे तो मजा देता है, उससे ज्यादा हो तो दर्द का सबब बन जाता है। प्लेयर अननोन बैटल ग्राउंड यानी पबजी की लत के परिणाम भी कुछ इसी तरह सामने आ रहे हैं। ताजा मामला राजधानी भोपाल का है, जहां पबजी का एक्साइटमेंट 16 साल के टीनएज में इस कदर बढ़ा कि उसकी जान पर बन आई। हालांकि, समय पर इलाज के चलते बात नहीं बिगड़ी। अब मां-बाप बच्चे को एडिक्शन से निकालने की जददोजहद में लगे हैं। हालत यह है कि बेटा नींद में भी गेम के ही स्टेप्स बड़बड़ाता है। अशोका गार्डन निवासी गुप्ता परिवार के इस बेटे को लगभग 10 माह पहले पबजी की लत लगी। डांट के डर से वह रात में चुपचाप गेम खेलता था। वह गेम के विनिंग पॉइंट चिकन-डिनर को जीतने के करीब पहुंच गया था। पिछले हफ्ते गेम खेलते हुए रात 11:30 बजे वह अचानक गिर कर बेहोश हो गया। डॉक्टर्स के पास जाने पर पता चला कि उसका बीपी 170/ 93 पर है। फिलहाल वह डॉक्टर्स के आॅब्जर्वेशन पर है।

रियल एक्सपीरियंस बढ़ाता है एक्साइटमेंट

इंदौर के एप एंड गेम डेवलपर भावेश सिसौदिया कहते हैं कि पबजी गेम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसका बैटल फील्ड बिल्कुल असली सा लगता है। साउंड इफेक्ट इसे और भी रियल बना देता है। यही नहीं यहां एक साथ सैकड़ों खिलाड़ी खेलते हैं और हर खिलाड़ी अपनी टीम के साथ भी खेल सकता है। यही वजह है कि इसे खेलते वक्त खिलाड़ी इसे वर्चुअल की जगह असल मानने लगता है और एक्साइटमेंट और प्रेशर लेवल दोनों बढ़ जाते हैं।