रवींद्रनाथ टैगोर के गीतों से गूंजा सभागार

रवींद्रनाथ टैगोर के गीतों से गूंजा सभागार

भोपाल । तुनीर संस्था के द्वारा महान कवि गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि के तौर पर विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम शहीद भवन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नाट्य विद्यालय के निदेशक आलोक चटर्जी और रंगकर्मी पापिया दास गुप्ता मौजूद रहीं। कार्यक्रम में तीन अलग अलग प्रस्तुतियां हुईं जिसमें पहले सत्र में गीत गायन हुआ। जिसमें कवि रवींद्रनाथ टैगोरे के द्वारा लिखे मानसून पर आधारित गानों और कविताओं का पाठ किया गया। गीत और कविता पाठ में मेग्धआ सरकार, सुजाता चौधरी, अबीर चौधरी, अपर्णा दास, अमीकाभ मंडल, कविता मिश्रा के साथ अन्य कलाकारों ने प्रस्तुति दी। इसके बाद गुरूदेव रवींद्रनाथ की लिखी कहानी रमणीय पर आधारित नाटक मैं हूं शंभू की प्रस्तुति हुई। यह लघु नाटक था।

हुई शापमोचन नृत्य नाटिका

प्रस्तुति की अगली कड़ी में शापमोचन नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी। इसका निर्देशन मधुरी चट्टोपाध्याय ने किया। यह प्रस्तुति 40 मिनट की रही। साथ ही इसकी शुरूआत नाटिका की शुरूआत स्वर्ग लोक के दृश्य से होती है यहां मृदंग वादक शौरो सेन अपनी ताल से देवराज इंद्र को प्रसन्न कर देता है उसी ताल पर स्वर्ग लोक की अप्सरा उर्वशी भी नृत्य कर रही होती है। शौरोसेन अचानक पत्नी की याद में खो जाता है और मृदंग की ताल टूटने पर इंद्र उसे श्राप देने वाले होते हैं , लेकिन इंद्राणी उन्हें रोक लेती फिर भी इंद्र दोनों को पृथ्वी पर कष्ट भोगने का श्राप दे देते हैं। शौरो सेन का जन्म गंधार में अरुणेश्वर और मोघुश्री का जन्म मद्र राज्य में कोमौलिक के रूप में जन्मलेती है। एक दिन कोमौलिक का चित्र देख उसे अतीत याद आने लगता है।