लड़े सेना, क्रेडिट कोई दूसरा ले, यह शहीदों के परिजनों का अपमान है

लड़े सेना, क्रेडिट कोई दूसरा ले, यह शहीदों के परिजनों का अपमान है

रिटायर्ड अफसरों ने सेना के दुरुपयोग पर जताई नाराजगी , सर्जिकल स्ट्राइक पर सियासत से खफा

भोपाल। देश में पुलवामा हमले के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक पर सियासत जमकर चल रही है। इसके राजनीतिकरण को लेकर सेना के 5 रिटायर्ड अफसरों ने नाराजगी जताई है। दिल्ली, नोएडा और कश्मीर से जुटे इन पूर्व सैन्य अफसरों ने सेना को राजनीतिककरण से बचाने मुहिम चलाए जाने की जरूरत बताते हुए कहा कि लड़े सेना, क्रेडिट कोई दूसरा ले, यह शहीद के परिजनों का भी अपमान है।

उन्होंने बोफोर्स तोप को लेकर कहा कि यदि कारगिल युद्ध के दौरान विफोर्स हमारे पास नहीं होती तो हमारे 123 जवान मारे जाते।

लंगड़ी पेंशन है वन रैंक वन पेंशन 
 रिटायर्ड कर्नल शशि वैद्य ने वन रैंक वन पेंशन को लंगड़ी पेंशन बताते हुए कहा कि सरकार ने रेड्डी कमीशन की रिपोर्ट को अब तक लागू नहीं किया गया है, जबकि यह ढाई साल पुरानी बात हो गई है। हम सुप्रीम कोर्ट में गए, तो सरकार ने लिखकर दे दिया कि इन्हें और सुविधा नहीं मिलनी चाहिए।

रिटायर्ड मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव, टीके कौल, गगनजीत सिंह चंडीगढ़, कर्नल मकबूल शाह ब्रिगेडियर अनिल मल्होत्रा और कर्नल शशि वैद्य ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि चुनाव में उठाए जाने वाले मसलों से सेना आहत हो रही है। टीके कौल ने कहा कि कश्मीर में काफी कुछ बताया जाता है, लेकिन मीडिया में जो बताया जाता है, वह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि देश मे कई प्रधानमंत्री बने, पर किसी प्रधानमंत्री ने सेना को अपना बताने की कोशिश नहीं की है। हिंदुस्तान में 1947 और 65 में भी युद्ध हुए। बावजूद इसके किसी ने फायदा उठाने की जरूरत नही समझी। सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर उन्होंने सेना की नियमित कार्रवाई बताते हुए कहा कि कई क्रॉस फायर हम सबने करवाया, लेकिन कभी बताने की आवश्यकता महसूस नही की गई है। उन्होंने कहा कि नकली राष्ट्रवाद के खिलाफ सबको लड़ना होगा। अभिनंदन के मामले में उन्होंने कहा कि यह रुटिन प्रक्रिया है, उसके पहले भी पाक ने हमारी सेना के दो जवानों को छोड़ा था।