सरकारी छोड़, प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीज लेकर पहुंची एंबुलेंस

सरकारी छोड़, प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीज लेकर पहुंची एंबुलेंस

ग्वालियर। प्राइवेट हॉस्पिटल से मिलने वाले कमीशन का मोह एंबुलेंस वालों का खत्म नहीं हो रहा है, इतनी सख्ती के बाद भी एंबुलेंस वाले मरीज को शिंदे की छावनी स्थित जीवन श्री हॉस्पिटल में ले जा रहे हैं। एंबुलेंस चालक ने दतिया के 55 साल के बहादुर सिंह नाम मरीज को इस प्राइवेट नर्सिंगहोम में गुरुवार को भर्ती करा दिया। मरीज के परिजन ने यह कहकर डिस्चार्ज कराने के लिए कहा कि वह तो उनके पास पैसे नहीं है वह यहां इलाज कराना नहीं चाहते हैं। एंबुलेंस चालक मरीज को छोड़कर भाग गया और नर्सिंगहोम वालों ने भी डिस्चार्ज करने से मना कर दिया। मरीज के परिजनों द्वारा हंगामा करने के बाद उन्हें बिना बिल लिए रैफर कर दिया। मरीज के परिजनों की शिकायत पर सीएमएचओ डॉ. मृदुल सक्सेना के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गुरूवार की रात करीब 9.30 बजे जीवनश्री अस्पताल में पहुंची। टीम में शामिल डॉ. सचिन श्रीवास्तव व एंबुलेंस के नोडल अधिकारी आई.पी. निवारिया ने अस्पताल के आईसीयू में भर्ती मरीजों से बातचीत की तो मुरैना निवासी सात वर्षीय अजय के पिता ने बताया कि जबर सिंह ने बताया कि सडक दुर्घटना में बच्चे के सिर में चोट आई थी। जिसके उपचार के लिए वह धौलपुर पहुंचे थे, जहां से बच्चे को जयपुर के लिए रैफर किया गया। लेकिन एम्बुलेंस संचालक ने उन्हें जीवनश्री में भर्ती करा दिया। पिता ने यह भी बताया कि उसके पास इतने पैसे नहीं है कि वह अपने बच्चे का यहां उपचार करा सके। इस पर डॉ. श्रीवास्तव ने बच्चे को जयारोग्य के लिए रैफर करने के निर्देश दिए। इसी तरह टीम ने जब मरीज बहादुर सिंह को लाने वाली एम्बुलेंस की जानकारी मांगी तो अस्पताल का स्टॉफ उपलब्ध नहीं करा पाया। इस पर डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने पिछले सात दिनों की सीसीटीबी फुटेज मांगते हुए कहा कि अगर फुटेज नहीं दी गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह टीम को आईसीयू में अन्ट्रेड नर्सिंग स्टॉफ मिला, जिस पर टीम ने संबंधित स्टॉफ को फटकार लगाते हुए नाराजगी व्यक्त की।

खाली सहमति पत्र पर कराए हस्ताक्षर

टीम ने जब आईसीयू में भर्ती बच्चे अजय की कैस सीट देखी तो उसमें परिजनों द्वारा दी गई सहमती पत्र पर हस्ताक्षर तो थे, लेकिन सहमती पत्र पूरी तरह खाली था। इस पर डॉ. श्रीवास्तव ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मरीज दो दिनों से भर्ती है और अभी तक सहमती पत्र ही नहीं भरा गया।