100 से अधिक मरीजों के इलाज में जुटा 400 का स्टाफ, अस्पताल को बनाया घर

  100 से अधिक मरीजों के इलाज में जुटा 400 का स्टाफ, अस्पताल को बनाया घर
अरबिंदो हॉस्पिटल कोरोना पॉजिटिव मरीजों के लिए बना वरदान

अरबिंदो हॉस्पिटल कोरोना पॉजिटिव मरीजों के लिए बना वरदान
कोविड 19 के लिए 525 बेड की क्षमता वाले अरबिंदो अस्पताल में 100 से अधिक मरीज उपचाररत हैं। इनके इलाज के लिए 170 डॉक्टर, 125 नर्सिंग स्टाफ और 110 दस चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सहित 400 से अधिक लोग अपनी सेवाएं दिन-रात दे रहे हैं। 
एक पूरी बिल्डिंग रिजर्व
अरबिंदो के चेयरमैन डॉ. विनोद भंडारी बताते हैं जब भारत में कोविड 19 का पहला मरीज सामने आया था, तभी से हमने यहां तैयारी शुरू कर दी थी। हमने अपनी एक पूरी बिल्डिंग ही कोरोना के मरीजों के लिए रिजर्व रखी है। जिसमें 67 आईसीयू बेड सहित 525 बेड हैं। कोरोना मरीजों की तीमारदारी में लगे 150 से अधिक डॉक्टर्स और स्टाफ ने अस्पताल को ही अपना घर बना लिया है।
मरीजों का रिकवरी
रेट अच्छा
डॉ. भंडारी दावा करते हुए कहते हैं कि हम इंदौर में कोरोना की चेन को जल्द तोड़ने में कामयाब होंगे। उन्होंने कहा कि इसका एक बड़ा कारण यह है कि शासन ने बहुत अच्छी तरह से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को क्वारेंटाइन और आइसोलेट कर लिया है। लिहाजा अब पहले ही अपेक्षा बीते तीन दिनों में कोरोना के कम मरीज आ रहे हैं। वहीं जो मरीज संक्रमित हैं, उनकी रिकवरी रेट भी अच्छी है। अब अधिकतर रिपोर्ट निगेटिव प्राप्त हो रही हैं। इस आधार पर कह सकता हूँ कि कोरोना की चेन जल्दी टूट सकती है।
अमेरिका के डॉक्टर से लिया आनलाइन परामर्श
डॉ. भंडारी ने बताया कि आईसीयू में भर्ती मरीजों की जल्दी रिकवरी के लिए अमेरिका के डॉक्टर की एमवाय के डॉक्टर, एम्स और सेम्स के डॉक्टरों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कराई है। इस दौरान अमेरिका के डॉक्टर ने कुछ टिप्स दिए हैं, जिससे मरीजों को स्वास्थ्य लाभ हो सकता है। साथ ही डॉक्टर ने आनलाइन परामर्श की मदद की पेशकश की है। 
15 दिन से दूर हूं परिवार से
 कोरोना महामारी से डर तो लगता है, लेकिन इस पेशे को अंगीकार करते समय ली गयी शपथ हर बार याद आती है कि मरीजों के जीवन की रक्षा करना ही चिकित्सा धर्म है। मैं 15 दिन से अपने परिवार से दूर हैं। अस्पताल को ही अपना घर बना लिया है, ताकि मरीजों की तीमारदारी में कोई कमी न रहे।  घर में बुजुर्ग माता-पिता,पत्नी और  3 व 5 साल के दो बेटे हैं। लेकिन बच्चे काफी समझदार हैं। यही कहते हैं पापा मरीजों को जल्दी ठीक कर दो और कोरोना को भगा दो। वहीं माता-पिता हर बार फोन पर यही कहते हैं कि अपना ख्याल रखना और बार- बार हाथ धोते रहना। मुझे लगता है कि कोरोना पर हम जल्दी विजय पा लेंगे यदि इसी तरह लोग लॉक डाउन का पालन कर सोशल डिस्टेन्स बनाते रहे। 
-डॉ. रवि दोशी, अरबिंदो अस्पताल 
देश सेवा से पीछे कैसे रहती 
जब पूरा देश महामारी के संकट से गुजर रहा है, तब  देश सेवा से खुद को कैसे अलग रखती। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इस तरह की महामारी का सामना करना पड़ेगा। मेडिकल प्रोफेशन में नित नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनसे दो-दो हाथ करने से हमारे काम में परिपक्वता आती है। लिहाजा सीखने और सेवा के उद्देश्य से मैं अपनी सेवा सुचारु रखना चाहती हूं। जब मरीज अस्पताल आते हैं तो बहुत डरे होते हैं, ऐसे में हम लोग काउंसलिंग कर उनका डर निकालते हैं और हौसला बढ़ाते हैं कि सफलतापूर्वक कोरोना की जंग हम सब मिलकर जीत लेंगे, लेकिन इसके लिए मरीज को खुद का आत्मविश्वास और डॉक्टर पर विश्वास बनाए रखना जरूरी है। 
ओशीन, 
नर्स, अरबिंदो अस्पताल